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2031 तक ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या 1.4 मिलियन के करीब पहुंच जाएगी: लूथरा
November 7, 2020 • Admin • अंतर्राष्ट्रीय

 ऑस्ट्रेलिया में चीनी मूल के नागरिकों की संख्या से ज्यादा होगी 

 

ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, यूएई और यूके में विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 2020 की शुरुआत, ऑनलाइन कार्यक्रम में दिखा सांस्कृतिक सामंजस्य

 

भोपाल। 15 से अधिक देशों की संस्कृति, कला और साहित्यिक विरासत को मनाने वाले विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 2020 की शुरुआत 6 नवम्बर (शुक्रवार) को ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, यूएई और यूके में हुई। 

 

पहला सत्र : ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया इस ऑनलाइन कार्यक्रम की शुरुआत में मैक्वायर यूनिवर्सिटी में भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित कर किया गया। विश्वरंग ऑस्ट्रेलिया की डायरेक्टर रेखा राजवंशी ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस ऑनलाइन कार्यक्रम की शुरुआत की। विश्वरंग ऑस्ट्रेलिया के तहत सबसे पहले शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति हुई। जिसमें कई कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा। इसके बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के गणमान्य व्यक्तियों ने दोनों देशों के लोगों के लिए अपना संदेश दिया। ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त ए गीतेश शर्मा ने कहा कि ‘भारत और ऑस्ट्रेलिया के लोग भले ही अलग हों पर सभी में कला और साहित्य के प्रति समान प्रेम हमें एक दूसरे से जोड़कर रखता है। इससे हमारे समाज का और हमारा विकास होता है। मैं संस्कृति के बिना दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकता।’ कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलियाई सांसद जूलुयन लेसर, नेता प्रतिपक्ष जोडि मैकाय और भारत के महावाणिज्य दूत राज कुमार ने भी अपनी बात रखी। 

 

2031 तक चीनी मूल के नागरिकों की संख्या से ज्यादा होगी ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों की संख्या : पवन लूथरा

भारतीय मीडिया लिंक ग्रुप के सीईओ पवन लूथरा ने मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों में प्रवासी लोगों के महत्व पर बोलते हुए कहा कि ‘दो देशों का रिश्ता कई आयामों पर निर्भर रहता है। ये आयाम राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और खेल से संबंधित हो सकते हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में लोगों का आपसी सामंजस्य अहम भूमिका निभाता है। रिपोर्ट के अनुसार 7050 से ज्यादा भारतीय ऑस्ट्रेलिया के समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2031 तक ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या 1.4 मिलियन के करीब पहुंच जाएगी, जो कि ऑस्ट्रेलिया में चीनी मूल के नागरिकों की संख्या से ज्यादा होगी।’ इस दौरान लूथरा ने कार्यक्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों के भविष्य पर भी प्रकाश डाला।

 

अंग्रेजी साहित्य की उन कहानियों पर चर्चा हुई जो हमें आकर्षित करती हैं

कार्यक्रम में आगे श्रीजनी दान ने बांग्ला संगीत का जादू बिखेरकर श्रोताओं का मन मोह लिया। इसके बाद मल्टीकनेक्शन मॉर्डरेटर की सीईओ शेबा लंदकेलर ने दोनों देशों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने में 'सॉफ्ट पावर' के महत्व को समझाया। इंडियन कॉन्सुलेट सिडनी के डायरेक्टर रमानंद गर्ग, न्यूलैंड ग्लोबल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर दिपेन रुघानी, ऑस्ट्रेलिया इंडिया बिजनेस काउंसिल के इरफान मलिक और चार्लेस थॉमसन ने भी इस विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आगे अंग्रेजी साहित्य की उन कहानियों पर चर्चा हुई जो हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इस सत्र का संचालन रेखा राजवंशी द्वारा किया गया। इस सत्र में निम घोलकर, बेन डोहर्टी और रॉना गोंसालविस भी शामिल हुए। 

 

हिंदी कवि सम्मेलन में भारतीय मूल के 12 कवियों ने सुनाई रचनाएं

विश्वरंग ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न के डांस ग्रुप ने घुंघरू नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का समापन हिंदी कवि सम्मेलन के साथ हुआ। इस सत्र का संचालन भी रेखा राजवंशी ने किया। कवि सम्मेलन में मेलबर्न के हरिहर झा, सिडनी के अनिल वर्मा, मेलबर्न के सुभाष शर्मा, सिडनी के अलवास रजा अल्वी, सिडनी के प्रगीत कुंवर, ब्रिसबेन के सोमा नायर, एडिलेड के राय कूकाना, पर्थ के कुशल कुशलेन्द्र, कैनबरा के किशोर ननग्रानी, सिडनी की भावना कुंवर, कैनबरा के अवधेश प्रसाद और ब्रिसबेन की मधु खन्ना ने अपनी रचनाएं सुनाई।

 

 

तिथि दानी ने सुनाया - ‘हां मैं मुकम्मल होना चाहती हूं’

विश्वरंग यूके का दूसरा सत्र हिंदी कवियों के नाम रहा। आशीष मिश्रा ने इस सत्र का संचालन किया। कवयित्री तिथि दानी ने 'हां मैं मुकम्मल होना चाहती हूं' कविता से सभी का मन मोह लिया। उनके बाद डॉ. अजय त्रिपाठी वाकिफ ने "कुछ मायूसों की बस्ती में मैं ख्वाब बेंचने आया हूं" कविता का पाठ किया। डॉ. निखिल कौशिक, जाकिया जुबेरी, डॉ. वंदना मुकेश और डॉ. पद्मेश गुप्ता ने भी अपनी कविताओं से सभी को आनंदित किया। 

 

विश्वरंग यूके के तीसरे सत्र में ओबीई सम्मान से सम्मानित मीरा कौशिक, प्याली रे और कृति यूके की संस्थापिका तितिक्शा शाह ने ब्रिटेन में कला और संस्कृति पर चर्चा की। ब्रिटेन में पिछले तीस सालों में कला और साहित्य का विकास कैसे हुआ है और भारत के साथ ब्रिटेन के सांस्कृतिक संबंध कितने पुराने हैं। इस विषय पर तीनों बड़ी हस्तियों ने चर्चा की। मीरा कौशिक ने बताया कि भारत और ब्रिटेन का संबंध 16वीं सदी से रहा है। समय के साथ इस रिश्ते में बदलाव आया है और दोनों देशों ने एक दूसरे को सांस्कृतिक रूप से काफी प्रभावित किया है। कार्यक्रम के अंत में एश्वर्य कुमार ने सभी का आभार जताया।

 

दूसरा सत्र सत्र : सिंगापुर 

सिंगापुर में विश्वरंग के उद्घाटन सत्र की शुरुआत लोक संगीत और नृत्य के साथ हुई। पहले अम्बा स्तुति को सिंगापुर की प्रमुख लोक नर्तक व केएफए की निदेशक मीरा बालासुब्रमण्यम द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसमें स्व-मूल्य की भावना को उकेरकर मन और आत्मा को सशक्त बनाने का आकर्षक संदेश दिया गया। 

 

यह सत्र प्रसिद्ध साहित्यिक व्यक्तित्व और लेखकों पर केंद्रित रहा। इस सत्र में येल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव एस पटके ने कहा कि यह साहित्य सत्र सिंगापुर संस्कृति का परिचय देता है। राजीव पटके ने उपन्यासकार, पुरस्कार विजेता लघु कथाकार, सुश्री कंगलाथा का परिचय दिया। वहीं कंगलाथा ने बताया कि उनकी रचना मुख्य रूप से महिलाओं के सम्मान और गौरव को सशक्त बनाने पर है। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की बुनियाद हैं। 

 

इसके बाद आयोजित कविता सत्र सिंगापुर के कलाकारों के नाम रहा। जिसका संचालन गौरी श्रीवास्तव और शार्दुला नोगाजा ने किया। इस सत्र में निधि गुप्ता, अभिनव मिश्रा, राहुल पारीक, गरिमा तिवारी शलभ भरगवा, शार्दुला नरगोजा, अरुणा साहनी, विनोद दुबे, पंकज पोरवाल, राजेंद्र तिवारी शामिल रहे। सत्र में कवि डॉ जय सुहानी ने कहा कि कवि वे सार हैं जो समय के साथ हमारे समाज और संस्कृति को बांधे रखते हैं। इसके बाद मीट द ऑथर सेशन में किशोर महुबानी ने अमित गुप्ता के साथ किताब ‘हैज़ चायना वॉन’ पर चर्चा हुई। 

 

तीसरा सत्र : यूएई

यूएई की राजधानी शारजाह में विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का आगाज सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ। इस दौरान यूएई में लंबे समय से रहने वाले भारतीयों ने अपने अनुभव भी साझा किए। इस दौरान 15 साल की सुचेता सतीश ने एक ही गाने की 10 भाषाओं में प्रस्तुति दी। सुचेता 128 भाषाओं में गाना गाती हैं। इसके बाद यूएई की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना आरती अग्रवाल और उनकी बेटी प्रेक्षा अग्रवाल ने शास्त्रीय नृत्य के बारे में अपने विचार साझा किए। वे शारजाह में हार्मनी संगीत कला केंद्र का संचालन करती हैं। इस मां बेटी के डुओ ने कथक के माध्यम से शिव स्तुति की प्रस्तुति दी। वहीं धन्या राधाकृष्णन ने भरतनाट्यम, निकिता आलम के ग्रुप ने वेस्टर्न और क्लासिकल डांस के फ्यूजन पर और विशुद्धी शाह ने राजस्थानी कालबेलिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। 

 

 

विश्वरंग में गूंजा देशराग

- वृन्दगान और नाट्य रूपक ‘अभ्यास’ की प्रस्तुति

- चित्रकला प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता के पोस्टर का लोकार्पण

- स्कोप महाविद्यालय में पोस्ट कोविड-19 की दुनिया पर मंथन

भोपाल। टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र द्वारा इफ्तेख़ार क्रिकेट अकादेमी के सहयोग से आयोजित ‘विश्वरंग’ की सांस्कृतिक गतिविधियों का तीन दिवसीय उत्सव शुक्रवार को चरम पर पहुँचा। इस मौके पर टैगोर चित्रकला प्रदर्षनी एवं प्रतियोगिता के बहुरंगीय पोस्टर का लोकार्पण भी किया गया। संगीत की सभा की शुरूआत सुरेन्द्र वानखेड़े के संयोजन में तैयार वृन्दगान से हुई। धर्मवीर भारती के लोकप्रिय नाटक ‘अंधायुग’ के सामूहिक नंदी पाठ ने सभा का मांगलिक उद्घोष किया। परंपरा की इस सुरीली दस्तक के बाद वतन परस्ती के नग्मों ने माहौल को शौर्य, पराक्रम और वीरता के ओजस्वी रंगों से सराबोर कर दिया। सुभद्रा कुमारी चौहान की यादगार कविता ‘वीरों का कैसा हो वसंत’ और शिवमंगलसिंह सुमन की रचना ‘तूफ़ानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार’ का कोरस जैसे ही ताल वाद्यों के साथ बढ़त लेता गूँजा, सभागार में मौजूद दर्शक-श्रोताओं के जेहन में हिन्दुस्तान की आज़ादी का जंग और देशभक्ति के जज़्बात कौंध उठे। वृन्दगान की समापन प्रस्तुति थी- ध्वज गान- ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा’।

द राइज़िंग सोसाईटी ऑफ आर्ट एण्ड कल्चर ने ‘विश्वरंग’ के निमित्त नाट्य रूपक ‘अभ्यास’ का प्रयोग परिकल्पित किया। प्रतिभाशाली रंगकर्मियों गोदान और तानाजी ने इस बेहद अनूठी प्रस्तुति को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री प्रीति झा तिवारी के मार्गदर्शन में तैयार किया है। ‘अभ्यास’ दरअसल, नाटक के क़िरदारों के रचनात्मक अंतर्द्वन्द्व और बेचौनी को अभिव्यक्त करती कहानी है। कार्यक्रम में कलाकारों का स्वागत रबीन्द्रनाथ टैगोर विष्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, कुलपति डॉ. ब्रम्हप्रकाश पेठिया, सीआरजी के संयोजक प्रो. वी. के. वर्मा, आईसेक्ट की रजिस्ट्रार सुश्री पुष्पा असिवाल और कला संकाय की डीन डॉ. ऊषा वैद्य ने किया। टैगोर विश्व कला केन्द्र के निदेशक विनय उपाध्याय ने सभा का संचालन करते हुए ‘विश्वरंग 2020’ के सांस्कृतिक नवाचारों का ज़िक्र किया।

स्कोप महाविद्यालय में विश्वरंग के तहत पोस्ट कोविड-19 की दुनिया पर मंथन

 

स्कोप महाविद्यालय में विश्वरंग के तहत पोस्ट कोविड-19 की दुनिया पर मंथन भी हुआ। स्कोप महविद्यालय के सभागार में कार्यक्रम का विषय बड़ा ही सामयिक था “पोस्ट कोविड-19 दृ चुनौतियां, प्रभाव और अवसर”। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की पीएनपी डायरेक्टर डॉ. मोनिका सिंह ने सभी उपस्थित जनों का स्वागत कर किया। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं में स्कोप पब्लिक स्कूल की प्राचार्या डॉ. प्रकृति चतुर्वेदी, सेक्ट बी.एड कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नीलम सिंह, स्कोप कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के प्राचार्य डॉ. सतेन्द्र खरे तथा स्कोप ग्रुप ऑफ एजुकेशन के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र सिंह थे। सभी ने कोविड 19 से हुए नुकसान से ज्यादा इससे हुए फायदों के बारे में विस्तार से चर्चा की। तकनीकी बदलाव व इससे हुए लाभों को विस्तार में बताया कि किस तरह सभी ने अपनी कार्यशैली में तकनीक से कदमताल करते हुए सफलता के नए मुकाम हासिल किए हैं जो कि संस्था की प्रगति के साथ-साथ स्वयं की उन्नति का भी कारण बने। संस्था के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र सिंह ने बताया कि किस तरह से सभी ने कठिन परिस्थितियों में अपने घरों से तकनीकी का सहारा लेकर कार्य किया और सफलता पाई।