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अक्षुण्ण जैव विविधता को संरक्षित कर रहा वाल्मी
June 30, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

भोपाल। ग्लोबल बायोडायवर्सिटी एजुकेशन सोसायटी द्वारा प्रदेश के शीर्ष तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान वाल्मी के पहाड़ी क्षेत्र की ढ़ालू जमीन पर प्राकृतिक रूप से उपलब्ध वनस्पति व जीव जंतुओं के विकास एवं जीवन चक्र का अध्ययन किया गया है। उनके द्वारा वाल्मी क्षेत्र में किए गए अध्ययन सर्वेक्षण प्रतिवेदन अनुसार यहां 173 प्रजाति की वानस्पतिक प्रजातियां, 151 प्रजाति के जीव जंतुओं की प्रजातियां सूचीबद्ध किए गए हैं। वानस्पतिक प्रजातियों में कई दुर्लभ औषधीय, सुगंधित एवं अन्य गुणवत्ता वाले पेड़ पौधे सम्मिलित हैं जो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में लुप्त होने की कगार पर हैं। इस प्रकार यहां कई जंगली जानवर जैसे तेंदुआ, हिरण खरगोश, जंगली सूअर, लोमड़ी एवं मोरों के झुंड इत्यादि भी विचरण करते हुए पाए गये हैं। सर्वेक्षण करने वाले विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसा की गई है कि प्राकृतिक रूप से अक्षुण्ण जैव विविधता को जो हजारों वर्षों से संरक्षक एवं संधारित है, इस धरोहर को और अधिक सुरक्षित रखते हुए विशेषज्ञों की अनुशंसा को दृष्टिगत रखते हुए वाल्मी के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव द्वारा बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के लिए लिखा जा रहा है कि संस्थान बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के रूप में चिन्हित किया जावे। उल्लेखनीय है कि हमारे देश में अभी चुनिंदा बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट ही चिन्हित हैं। इन चुनिंदा जैव विविधता हेरिटेज क्षेत्रों में वाल्मी भोपाल का सम्मिलित किया जाना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि होगी। यह हेरिटेज साइट प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में प्रथम क्षेत्र होगा। भोपाल तथा प्रदेशवासियों को इस अक्षुण्ण प्राकृतिक संपदा को देखने वाला समझ ने का अवसर मिलेगा।