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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस- एक दृष्टि 109वॉ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाएंगे हम
March 8, 2020 • उषा चतुर्वेदी एडवोकेट
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है। विश्व की विभिन्न क्षेत्रों एवं वर्गों की महिलाओं के प्रति सम्मान एवं  आदरांजली प्रकट करने हेतु निश्चित किया गया है। महिलाओं की आर्थिक राजनैतिक सामाजिक उपलब्धियों के प्रति साधुवाद एवं आभार प्रकट करने हेतु 8 मार्च को महिलाओं से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम किए जाते हैं । विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि प्राप्त महिलाओं का सम्मान एवं अभिनंदन भी किया जाता है। वास्तव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक मजदूर आंदोलन से उपजा इसका बीजारोपण सन उन्नीस सौ आठ में हुआ। 15000 हजार महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया उनकी मांग थी नौकरी के घंटे कम किए जाएं इसके अलावा समान वेतन एवं वोट देने का अधिकार भी उन्हें दिया जाए। सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इसे पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया।
महिला दिवस मनाने का विचार सर्वप्रथम क्लारा जेटकिन नाम की महिला ने किया और उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के दौरान सुझाव दिया उस कॉन्फ्रेंस में 17 देशों की100  महिलाओं की भागीदारी थी सभी ने इसका समर्थन किया। सन 1911 में डेनमार्क जर्मनी स्विट्जरलैंड ऑस्ट्रिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इसके अतिरिक्त सन 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के समय रूस की महिलाओं ने रोटी और कपड़े की मांग को लेकर हड़ताल शुरू की तथा मतदान देने का अधिकार भी मांगा उसदिन28 फरवरी का दिन था। रूस मैं उस समय जूलियन कैलेंडर प्रयोग होता था। गैंग्रीन कैलेंडर में 8 मार्च थी
सन 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने अधिकारिक मान्यता अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को प्रदान कि इसे वार्षिक तौर पर एक थीम पर मनाया जाने लगा। सन 1975 की थीम थी, सेलेब्रेटिंग द पास्ट प्लानिंग फ्यूचर,। सन 2019 की थीम थी नई सोच और लैंगिक समानता। सन 2020 में हम 109 में अंतर्राष्ट्रीय दिवस मना रहे हैं।
8मार्च ही क्यों?
वास्तव में कलारा जेटलीन ने कोई तिथि घोषित नहीं की थी। लेकिन सन 1917 में रूस की महिलाओं ने 28 फरवरी से हड़ताल शुरू की थी उस दिन गैग्रेरिन कैलेंडर में 8 मार्च थी तथा 8 मार्च ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस निश्चित किया गया। लंबे संघर्ष के बाद कुछ देशों की महिलाओं को मतदान करने का अधिकार प्राप्त हुआ। भारतीय महिलाएं इस मामले में सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें मतदान करने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ा क्योंकि हमारे संविधान में पहले से ही यह व्यवस्था थी। 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस संपूर्ण विश्व की महिलाएं देश जाति भाषा राजनीतिक सांस्कृतिक भेदभाव  छो? क2 एकजुट होकर मनाती हैं। पुरुष वर्ग भी इस दिन को महिलाओं के सम्मान में समर्पित करता है। इतिहास के अनुसार समान अधिकार की लड़ाई आम महिलाओं द्वारा शुरू की गई प्राचीन  ग्रीस में .लिसिस टाट  नाम की महिला ने फ्रेंच क्रांति के दौरान युद्ध समाप्त की मांग रखते हुए आंदोलन किया। फारसी महिलाओं ने ब्रसेल्स में इस दिन मोर्चा निकाला जिसका उद्देश्य युद्ध की वजह से महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार रोकना था। सन उन्नीस सौ 13,1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शांति की स्थापना के लिए रूसी महिलाओं ने आंदोलन किया।
      अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अब लगभग सभी विकसित विकासशील देशों में मनाया जाता है कई देशों में इस दिन छुट्टी होती है जैसे अफगानिस्तान वियतनाम युगांडा कंबोडिया रूस यूक्रेन रूसबेल जहां इस दिन महिलाओं के लिए विशेष अवकाश रहता है। महिलाएं समाज की धुरी होती हैं तथा घर परिवार के साथ समाज के हर क्षेत्र में उनकी अहम भूमिका होती है अत: उनकी उपलब्धियों की सराहना तथा उनकी भूमिका को  स्मरण कराने के लिए यह दिवस मनाया जाने लगा। इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ने कई महिला आंदोलनों  के लिए प्रेरणा का काम किया। सन 1982 में ईरान की महिलाओं ने महिला दिवस के अवसर पर पर्दा प्रथा के विरुद्ध पूरे साहस के साथ विरोध प्रदर्शन किया महिलाओं के एकजुट हो जाने के कारण ताइवान में मातृत्व अवकाश तथा अन्य सुविधाएं मिली।
     भारत में भी महिलाओं में आई जागरूकता तथा चेतना का प्रभाव दिखने लगा है सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों में महिलाएं महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं जिन क्षेत्रों में पुरुषों का एकाधिकार था उन क्षेत्रों में भी महिलाओं की प्रभावी उपस्थिति दिख रही है। इतना होने के बाद भी हालात में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आया महिलाओं की स्थिति वास्तव में सही मायने में तभी सुधर सकती है जब पुरुष प्रधान समाज भेदभाव के नजरिए से देखना बंद करें। हमारे देश की राजनीतिक पार्टियां जो संसद तथा विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने का अलाप राग रही हैं लेकिन सहमति नहीं यह प्रस्ताव सर्वप्रथम 1995 में आया था सदनों में हंगामा हुआ बिल फाड़ दिया गया नतीजा शून्य। सच बात बहुत कड़वी होती है यदि सच कहा जाए तो कोई भी राजनीतिक दल संसद तथा ।विधानसभा में एक तिहाई आरक्षण देने के पक्ष में नहीं हैं। महिलाओं  के मन को संतुष्ट करने के लिए नगरी निकाय नगर पालिका नगर निगम पंचायतों में आरक्षण प्रदान कर दिया गया लेकिन संसद या विधानसभा में आज तक बिल पारित नहीं हुआ।
    देश में शिक्षित होने का आंकड़ा बढ़ रहा है लेकिन शोषण जारी   ही है कामकाजी महिलाओं में 91त्न महिलाएं निजी क्षेत्र में नौकरी करती हैं शेष सरकारी क्षेत्रों में। महिलाएं आर्थिक क्षेत्र में  स्वाबलंबी   हो रही है लेकिन यातना नहीं रुक रही। महिलाओं को शोषण तथा यातनाएं रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे कड़े कानून बनाने पड़ेंगे  महिला संबंधी कानूनों में संशोधन करना पड़ेगा। पुरुषों को अपनी मानसिकता में भी परिवर्तन लाना होगा महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कमतर नहीं है यह स्वीकार करना होगा। महिलाओं को पूरा सम्मान मिले तो उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है और आत्म विश्वासी महिला परिवार समाज तथा देश को नई दिशा दे सकती है। यह बात उतनी ही सच है कि सरकार भी महिलाओं के लिए योजनाएं चला रही है लेकिन आज भी कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जा महिलाएं शोषण तथा प्रताडऩा की शिकार हो रही हैं तथा आज तक वहां ज्ञान का प्रकाश नहीं पहुंचा बेटा और बेटी में भेद होता है यही कारण है कि बेटियों की संख्या का आंकड़ा कम हो रहा है सरकारों को इस तरफ काफी ध्यान देना पड़ रहा है ताकि लिंगानुपात समान रहे।
अंत में मैं इतना ही कहना चाहती हूं महिलाएं अपने को कमतर न समझें उनके अंदर क्षमता तथा ज्ञान भी है। स्वयं निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करें ताकि उनकी स्थिति में बेहतर सुधार हो सके। मेरा उन महिलाओं से भी आग्रह है जो पाश्चात्य सभ्यता के रंग में रंग कर अपनी सीमाएंतोड़ रही है। विज्ञापनों के जरिए अपने शरीर का भोंडा प्रदर्शन कर रही हैं। यह महिलाओं की मर्यादा के विरुद्ध है। साथ ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी आग्रह भारतीय संस्कृति को खंडित ना करें ऐसे निर्णय ना महिला हित में होंगे और ना समाज हित में। महिलाओं के लिए अलग से शराब की दुकान खोलना क्या हमारी भारतीय संस्कृति है यह भी हमें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मनन तथा चिंतन करना है ताकि सरकार फिर से इस पर विचार करें
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सभी महिलाओं को शुभकामनाएं एवं बधाई
उषा चतुर्वेदी एडवोकेट