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बजट को जनोन्मुखी बनाने के लिए सीएम की वित्त विभाग के अफसरों के साथ बैठक
March 1, 2020 • Vijay sharma
राजस्व की कम वसूली और केन्द्रीय करों की हिस्सेदारी में कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें
 
भोपाल। वित्तीय संकट का सामना कर रहे मध्यप्रदेश में बजट जनकल्याणक बन सके इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वंय कमान सम्हाल ली है। बजट को अधिक उपयोगी बनाने के लिए वित्त विभाग के आला अफसरों के साथ आज उनकी महत्वपूर्ण बैठक की जा रही है। केंद्रीय कर और सहायता राशि में कटौती के साथ राज्य कर संग्रहण में संभावित कमी के चलते कुल बजट 27 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा घट सकता है। बजट में हुई इस कटौती के चलते वित्तीय मितव्ययता पर खासा जोर दिया जा रहा है।
मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 मार्च से आरंभ हो रहा है। वित्त मंत्री तरूण भनोत 20 मार्च को राज्य का बजट पेश करेंगे। मार्च में प्रस्तुत होने वाले कमलनाथ सरकार के दूसरे बजट के साथ मौजूदा बजट 2019-20 की स्थिति भी साफ होगी। केंद्रीय कर और सहायता राशि में कटौती के साथ राज्य कर संग्रहण में संभावित कमी के चलते कुल बजट 27 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा घट सकता है। वित्त विभाग ने बजट पुनरीक्षण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वाणिज्यिक कर विभाग प्रतिदिन राजस्व आय की समीक्षा कर रहा है। राज्य के करों से बजट में 65 हजार 273 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया गया था, जो संभावना है कि अब घटाकर करीब 56 हजार करोड़ रुपये किया जाएगा। सरकार राजस्व आय में कमी के चलते विभागों के बजट में 20 फीसदी से ज्यादा कटौती कर चुकी है। अभी इसके और घटने के आसार हैं।
सीएम करेंगे समीक्षा बैठक
राजस्व और केन्द्रीय कटौती के बावजूद राज्य के बजट को जनउपयोग बनाना राज्य सरकार के लिए चुनौती है। जनकल्याण के साथ ही विकास के काम भी प्रभावित ना हो इसके लिए वित्त विभाग के अफसर माथा पच्ची में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ भी आज वित्त विभाग के अफसरों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं जिससे बजट को कांग्रेस के वचनपत्र के निभाने के लिए कोई कमी ना छोड़ी जा सके। आज शाम सीएम हाउस में होने वाली इस बैठक में 
मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अफसर शामिल होंगे।
राजस्व की कम वसूली और कटौती ने बढ़ाई मुश्किल
वित्त मंत्री तरुण भनोत ने 10 जुलाई 2019 को विधानसभा में जब बजट प्रस्तुत किया था, तब केंद्रीय करों में प्रदेश का हिस्सा, केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान और राज्य करों से होने वाली आय के आधार पर एक लाख 79 हजार 353 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान लगाया था। अन्य माध्यमों से प्राप्त होने वाली राशि को मिलाकर दो लाख 14 हजार 363 करोड़ रुपये की प्राप्ति और दो लाख 14 हजार 85 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया था। केंद्र सरकार ने करों में प्रदेश का हिस्सा 14 हजार 233 करोड़ रुपये घटा दिया। वहीं, राज्य के करों से जो राजस्व (राशि) मिलना था, वो भी लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। वित्त विभाग का अनुमान है कि खजाने में लक्ष्य की तुलना में दस हजार करोड़ रुपये से कम राजस्व आ सकता है। केंद्रीय सहायता 26 हजार 68 करोड़ रुपये में से 31 जनवरी तक 15 हजार 862 करोड़ रुपये ही मिले हैं। लगभग चार हजार करोड़ रुपये और मिलने की संभावना है। हालांकि, राजस्व में कमी को देखते हुए सरकार वित्तीय प्रबंधन में जुट गई है। विभागों के बजट में 20 फीसदी से ज्यादा कटौती हो चुकी है। नए वाहन और उपकरण खरीदी के साथ पांच सितारा होटलों में कार्यक्रम रोक लगाई जा चुकी है। 
पड़ रहा है व्यापक असर
बजट में कटौती का असर निर्माण कार्य से लेकर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में वृद्धि तक पर पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के काम थम गए हैं तो ठेकेदारों को भुगतान भी नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2019 में कर्मचारियों के महंगाई भत्ता और राहत में पांच प्रतिशत की वृद्धि की थी, जो प्रदेश में अब तक लागू नहीं की गई है। मुख्यमंत्री कन्यादान और निकाह योजना के हितग्राहियों का सहायता राशि का भुगतान भी आधा-अधूरा ही हुआ है।