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भारत को हमें भारतीय दृष्टि से देखना होगा : प्रो अम्बिकादत्त
August 8, 2020 • Admin • शिक्षा

इतिहास में दर्ज है असंख्य वैश्विक महामारियां और समाधान

हमीदिया महाविद्यालय में राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

भोपाल। शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय भोपाल के इतिहास विभाग एवं एक भारत- श्रेष्ठ भारत क्लब द्वारा राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।एक भारत- श्रेष्ठ भारत क्लब द्वारा आयोजित वेबिनार में हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के आचार्य  प्रो. अम्बिका दत्त शास्त्री ने 'भारत की सांस्कृतिक एकात्मकता' तथा मिजोरम के शासकीय महाविद्यालय चौंगटे में प्रो. पंकज राय ने 'भारत में भाषायी वैविध्य' विषय पर व्याख्यान दिया। प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत को हमें समग्रता के आधार पर भारतीय दृष्टि से देखना होगा,यह भारत का एकात्म भाव ही ही है कि हम विविधता में एकता को देखते है।प्रो. पंकज राय ने पूर्वोत्तर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूर्वोत्तर में 600 से अधिक समृद्ध बोलियां हैं,आज बदलते समय में भाषाई विस्तार हो रहा है,नवीन शिक्षा नीति भाषायी एकता को जोड़ने में एक सकारात्मक कदम होगी। संयोजन डॉ. जेएस दुबे, डॉ अल्पना त्रिवेदी तथा आभार अनिल शिवानी ने व्यक्त किया। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ पीके जैन ने की।

इतिहास विभाग द्वारा कोविड-19 के संदर्भ में व्यक्त किए विचार

वहीं इतिहास विभाग द्वारा 'इतिहास में दर्ज वैश्विक महामारी का विश्व राजनीति, अर्थव्यवस्था व संस्कृति पर प्रभाव' विषय पर आयोजित वेबिनार में मुख्य अतिथि डॉ. एचसी जैन सेवानिवृत्त प्राचार्य शास.महाविद्यालय कोटा , राजस्थान,विषय विशेषज्ञ डॉ. ईश्वरशरण विश्वकर्मा प्रयागराज उप्र, अन्य अतिथि वक्ता डॉ. विपुल सिंह,एसोशिएट प्रोफेसर , दिल्ली विश्वविद्यालय,डॉ.बीएस ओहरी -डायरेक्टर स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल,डॉ.ललित पाण्डे ,प्राध्यापक एवं संचालक इंस्टीट्यूट आॅफ राजस्थान यूनिवर्सिटी उदयपुर ने अपनी बात रखी। स्वागत उद्बोधन प्राचार्य डॉ पीके जैन ने दिया तथा अध्यक्षता डॉ.गोपालसिंह नरूका,डायरेक्टर रिसर्च यूनिवर्सिटी आॅफ कोटा राजस्थान ने की। डॉ. जैन ने कहा कि हमें आने वाले समय में महामारियों के प्रति सजग रहना होगा,जीवन जीने के तौर-तरीकों को बदलना होगा।जब भी कोई नई महामारी या आपदा आती है तो वह हमें चुनौतियों के बीच सृजन का अवसर भी प्रदान करती है। 

डॉ विश्वकर्मा ने प्रागैतिहासिक काल से लेकर‌ वर्तमान काल तक असंख्य आपदा कालों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि  भारतीय साहित्य में महामारी से बचाव के अनेक औषधीय विवरण प्राप्त होते हैं।डॉ. विपुल सिंह ने कहा कि महामारी का विश्लेषण सिर्फ आर्थिक दृष्टि से नहीं अपितु पर्यावरणीय दृष्टि से भी होना आवश्यक है।डॉ. बीएस ओहरी ने कहा कि वर्तमान में कोविड 19 से डरने की आवश्यकता नहीं वरन उसको समझने व बचाव की आवश्यकता है।डॉ ललित पांडे ने इतिहास में दर्ज विभिन्न महामारियों जैसे कुष्ठ,फ्लेग आदि पर चित्रों के माध्यम से प्रकाश डाला।डॉ. गोपाल सिंह ने आर्थिक प्रयासों की ओर ध्यान आकर्षित किया जिनके आधार पर विश्व की अर्थव्यवस्था को आर्थिक मंदी की ओर जाने से रोका जा सकता है।संयोजन डॉ. रचना मिश्रा एवं आभार आयोजन सचिव डॉ. वंदना पाण्डे ने व्यक्त किया।