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भारतीय मनोविज्ञान की परंपरा सर्वाधिक प्राचीन - प्रो पंकज जैन
June 30, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

भोपाल। भारतीय मनोविज्ञान विश्व में सर्वाधिक प्राचीन है। मन की अवधारणा भारतीय प्राचीन साहित्य में 5000 वर्ष पूर्व से प्राप्त होती है जबकि पाश्चात्य मनोविज्ञान 18 वीं शताब्दी के बाद अपना रूप ले पाया। यह बात प्रोफेसर पंकज जैन, टैक्सास यूनिवर्सिटी अमेरिका ने प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान भोपाल द्वारा *शिक्षा मनोविज्ञान* विषय पर आधारित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार के उद्घाटन अवसर पर कीनोट स्पीकर के रूप में अपनी बात रखते हुए कही। उन्होंने फ्रायड के मनोविज्ञान की आलोचना भारतीय संदर्भ में बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत की। उन्होंने कहा की भारतीय मनोविज्ञान की परंपरा संपूर्ण व्यक्तित्व को साथ में लेकर चलती है जबकि पाश्चात्य परंपरा एकांत अथवा विपरीत व्यवहार का ही विवेचन प्रस्तुत करती है। इस अवसर पर कुलपति, पुनरुत्थान विश्वविद्यालय अहमदाबाद सुश्री इंदुमती काटदरे ने मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार की चर्चा करते हुए बताया कि इन चारों का समन्वय ही सम्यक व्यवहार का द्योतक है। यही हमारे व्यक्तित्व के निरूपक है। जब तक हम मन को नियंत्रण में नहीं लेंगे तब तक हम अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकेंगे। इंद्रियां और मन हमारा मूल करण है बाकी विद्यालय, पुस्तकें इत्यादि सब उपकरण है। हमें करण को मजबूत करना है उपकरण को नहीं। तृतीय सत्र में डॉक्टर द्रोण शर्मा, लंदन ने क्लीनिकल मनोविज्ञान पर अपनी बात रखते हुए बताया कि बच्चों के साथ एक शिक्षक का कैसा व्यवहार होना चाहिए, यदि बच्चा देर से सीखता है तो शिक्षक का क्या दायित्व है तथा बच्चे में सृजनात्मकता कैसे उत्पन्न की जा सकती है। वेबीनार के चतुर्थ सत्र में श्री अवनीश भटनागर, संयुक्त संचालक कंज्यूमर अफेयर मंत्रालय, भारत सरकार ने भारतीय मनोविज्ञान तथा पाश्चात्य मनोविज्ञान के मध्य जो विस्तृत सीमा रेखा बनी हुई है, उसकी ओर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने बताया की जहां से पाश्चात्य मनोविज्ञान समाप्त होता है वहां से भारतीय मनोविज्ञान का प्रारंभ होता है। वेबीनार के पांचवें और अंतिम सत्र में श्री भरत भाई धोकाई नियामक, कच्छ कल्याण संघ गांधीधाम ने व्यक्तित्व के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए व्यक्तित्व की अवधारणा स्पष्ट की। उन्होंने अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय, आनंदमय कोष की संपूर्णता को ही व्यक्तित्व की संपूर्णता बताया। उल्लेखनीय है कि संस्थान द्वारा यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का वेबीनार था जिसमें देश विदेश के 1372 प्रतिभागी सहभागिता कर रहे थे। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जिंबाब्वे, मलेशिया इत्यादि 14 देशों से तथा भारत के 24 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल थे। संस्थान में बीएड तथा एम एड का कोर्स संचालित होता है जिसमें शिक्षा मनोविज्ञान एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। अतः छात्राध्यापकों को समृद्ध ज्ञान प्रदान करने की दृष्टि से यह वेबीनार आयोजित किया गया था। इसके पूर्व जून माह में ही शिक्षा सिद्धांत तथा शोध प्रविधि पर भी राष्ट्रीय स्तर के दो वेबीनार आयोजित किये जा चुके है। संगोष्ठी संस्थान के प्राचार्य श्री धीरेंद्र चतुर्वेदी के कुशल मार्गदर्शन, डॉ रश्मि जैन, डॉ रजनी अग्रवाल, डॉ एफ एस खान के समन्वयन तथा डॉ महेश जैन के कुशल संयोजन में संपन्न हुई।