ALL शिक्षा मध्यप्रदेश मनोरंजन राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य खेल राजनीति
ब्रेकिंग,,,, फ्लोर टेस्ट को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई आज 11 बजे
March 16, 2020 • Admin

 भोपाल। मध्यप्रदेश तुरंत कमलनाथ सरकार के फ्लोर टेस्ट की मांग करने वाली पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की अर्ज़ी पर कल जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और हेमंत गुप्ता की बेंच सुनवाई करेगी। लिस्ट में मामला 6 नंबर पर है। इस लिहाज से 11 बजे के करीब सुनवाई शुरूहो सकती है। मध्य प्रदेश में चल रही सियासी घमासान के बीच फ्लोर टेस्ट को लेकर बीजेपी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच में जस्टिस चंद्रचूड़ और हेमंत गुप्ता करेंगे। याचिका में बीजेपी द्वारा मध्य प्रदेश में12 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग की गई है।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह  पहुंचे सुप्रीम कोर्ट...

अल्पमत में आ चुकी प्रदेश की कमलनाथ सरकार आज फ्लोर टेस्ट कराने से पीछे हट गई। आज सभी की नजर विधानसभा कार्यवाई पर टिकी हुई थी। जैसे की संभावना जताई जा रही थी सीएम कमलनाथ फिलाल अपनी सरकार को बचाने के लिए सदन में फ्लोर टेस्ट कराने से बचेगी। विधानसभा में आज राज्यपाल के संक्षिप्त अभिभाषण के बाद स्पीकर प्रजापति ने विधानसभा की कार्यवाई आगामी 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाई स्थगित करने का कारण कोरोना वायरस को बनाया गया है। जबकि भाजपा सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर अपनी सरकार बचाने के लिए गलत मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा यदि सरकार के पास बहुमत है तो फिर फ्लोर टेस्ट कराने से पीछे क्यो हट रहे है कमलनाथ। विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले के खिलाफ पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विधानसभा से निकलने के बाद शिवराज सिंह चौहान अपने विधायकों के साथ राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने पहुंचे और सरकार के फैसले पर विरोध दर्ज कराया। इधर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा भाजपा को जहां जाना है जाए।

राज्यपाल बीजेपी के एजेंट की तरह कर रहे हैं कार्य

मध्यप्रदेश में राज्यपाल की भूमिका को लेकर सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। महाधिवक्ता,मंत्री और सांसदतैयारी  कर रहे । कांग्रेस के  कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी आरोप है कि  राज्यपाल भाजपा के एजेंट की तरह कार्य कर रहे हैै। जो  संवैधानिक नहीं है।