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ध्यान से मिल रही उर्जा लॉकडाउन, कफ्र्यू में रोजाना ध्यान कर रहे लोग
April 4, 2020 • Admin
भोपाल। लॉकडाउन और कफ्र्यू के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए अपने घरों में रह रहे लोगों को इस स्थिति में अवसाद से दूर रखने के साथ ही आत्मिक शांति के लिए योग और ध्यान एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आया है। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पद्मविभूषित आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर द्वारा लॉकडाउन और कफ्र्यू की घोषणा के बाद आर्ट ऑफ लिविंग और श्री श्री रवि शंकर जी के आधिकारिक फेसबुक, इंस्टाग्राम पेज और यू ट्यूब चैनल पर लगातार प्रसारित किया जा रहा निर्देशित ध्यान ने संस्था से जुड़े साधक ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के करोड़ों सोशल मीडिया के दर्शकों द्वारा आत्मसात किया जा रहा है।
सभी के लिए खुले द्वार
आर्ट ऑफ लिविंग के स्टेट मीडिया कॉर्डिनेटर ऋतु राज असाटी ने कहा कि जब हमारे घरों के दरवाजे बंद हुए हैं तो गुरुदेव ने सभी के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के द्वार खोल दिए हैं ताकि उनकी अनूठी ध्यान विधि से कोई भी अछूता नहीं रहे। उन्होंने बताया कि गुरुदेव प्रतिदिन दोपहर 12  बजे और शाम साढ़े 7 बजे लाईव स्ट्रीमिंग के जरिए दो बार सभी को ध्यान करा रहे हैं। वल्र्ड मेडिटेशन के नाम से किए जा रहे लाईव मेडिटेशन में सभी 7 चक्रों को शुद्ध करने के साथ ही घरों में रहने के दौरान अवसाद से दूर रहने के लिए अद्भुद विधियों से ध्यान कराया जा रहा है जिससे न सिर्फ आर्ट ऑफ लिविंग के साधक बल्कि वे भी लाभ ले रहे हैं जो अब तक संस्था से नहीं जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि गुरुदेव की मुख्य उद्देश्य सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय: है अर्थात सभी प्रसन्न रहें और सभी निरोगी रहें।   
आंतरिक शक्ति ला सकता है लॉकडाउन
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के बारे में लॉकडाउन को उचित बताया। श्री श्री रविशंकर ने कहा, कि अलगाव आंतरिक शक्ति ला सकता है और यह आपके आंतरिक स्व से जुडऩे का सबसे अच्छा समय है।
अनुभव साझा कर रहे दर्शक
 शहर में श्रीश्री के साथ लाईव स्ट्रीमिंग से जुड़कर ध्यान कर रहे आर्ट ऑफ लिविंग के साधकों के साथ अन्य साधक लगातार इस विशेष निर्देशित ध्यान से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कुछ ने बताया कि अब उन्हें अच्छी नींद आ रही है तो कुछ का कहना है कि वे अब तनाव रहित महसूस कर रहे हैं। कुछ का कहना है कि डर और अनिश्चितता के इस माहौल के बीच ध्यान करने से उनकी मनोस्थिति ही परिवर्तित हो गई है। श्री नितिन ने साझा किया कि कोरोना के कारण वे चिंता महसूस कर रहे थे। उन्होंने दोपहर 12 बजे और शाम को 730 बजे श्रीश्री रविशंकर जी का नि:शुल्क ध्यान करना शुरू किया।  वह कहते हैं कि उनका तनाव और चिंता दूर हो गई है और अब वह सकारात्मकता से भरे हुए हैं।  वह शांति से सो पा रहे है।उन्होंने बताया कि वह हर दिन ये मेडिटेशन करते हैं और इन मेडिटेशन से बहुत लाभान्वित होते हैं। हिमांशी गुप्ता बताती हैं कि कोविद-19 के कारण उन्हें भविष्य के बारे में चिंता महसूस हुई।  फिर श्री श्री रविशंकर जी द्वारा कराए जा रहे ध्यान के बारे में पता चला। वह नियमित रूप से 12 और 1930 पर ये ध्यान कर रही हैं। वह सकारात्मक, ऊर्जावान और मानसिक शक्ति महसूस करती है। वह हर दिन अगले ध्यान के लिए बेसब्री से इंतजार करती है।