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दिग्विजय सिंह का दखल बना सरकार के लिए संकट, सिंधिया के साथ ही 26 विधायक हुए बागी
March 10, 2020 • विजय शर्मा

 प्रदेश में सियासी हलचल अब 2 दिन के लिए थमी

 विधायकों का आना जाना अभी जारी है

बीजेपी ने अपने विधायकों को भेज अज्ञातवास

भोपाल। बीजेपी ने अपने विधायको को जो कि आज कार्यालय में उपस्थित हुए उन्हें वोल्वो बसों के द्वारा भोपाल से बाहर रवाना कर दिया है।बीजेपी को भी यह डर है कि कहीं हमारे विधायकों को काँग्रेस अपने साथ ना मिला दे इससे बचने के लिए और आगे सरकार बनाने में किसी तरह की कमी ना आए उसको देखते हुए उन्होंने सभी विधायकों को  बस पहुंचाया है उनको किसी से संपर्क करने का मना किया गया है । यह किसी को नहीं मालूम कि उन्हें कहाँ भेज जा रहा है।

सिंधिया व विधायक 12 मार्च को बीजेपी में हो सकतें शामिल

सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार आज शाम को काँग्रेस के बागी विधायक व ज्योतिरादित्य सिंधिया को पहुंचना था, लेकिन वह नहीं पहुंचे।  बताया जाता है कि 13 मार्च को राज्यसभा के सदस्य के लिए मतदान होना है।  इसलिए सभी को 12 मार्च में एकत्रित होने के लिए कहा गया है। राज सभा सदस्य को लेकर अपने 2 सदस्य को 2 सीटों के चुनाव में खड़ा करेगी।

88 विधायक पहुंचे सीएम हाउस, फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार

कांग्रेस में मुख्यमंत्री कमलनाथ सीएम हाउस बैठक हुई सभी कमलनाथ व दिग्विजयसिंह के समर्थित  दोनों के विधायक बैठक में शामिल हुए जिसमें 88 विधायकों की जानकारी मिली है। बैठक उपरांत सभी सदस्यों ने सिंधिया मुर्दाबाद के  नारे लगाए। कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी सरकार का फ्लोर टेस्ट कराना चाहती है, हम उसके लिए तैयार है । ऐसा दो बार  करा चुकी है वहां पर वह फेल हो चुकी है अब इस बार भी  उन्हें  फ्लोर टेस्ट में फेल करेंगे ।

26 विधायक हैं सिंधिया के पास

 पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अभी भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है इससे साफ होता है कि कुछ भी हो सकता है । वर्तमान में जिस तरह से प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के पदाधिकारियों को लेकर व विधायकों को लेकर चल रहा है उसमें उनके सिंधिया के समर्थक विधायकों मंत्रियों ने  सामूहिक रूप से इस्तीफा भेज दिया है । वहीं कुछ लोगों का कहना है  श्री सिंधिया के पास 26 विधायक हैं। जिनमें से कुछ ने इस्तीफा भेज दिया है कुछ भेजने वाले हैं।

सिंधिया समर्थकों ने भी दिए इस्तीफे

सूत्रों से जानकारी मिली है भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा के प्रत्याशी व वर्तमान पार्षद गिरीश शर्मा, इंदौर के सत्यनारायण पटेल , विधायक हाटपिपलिया चौधरी, ग्वालियर सिंधिया समर्थक और प्रदेश सचिव सुरेंद्र शर्मा ने  कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। 

भोपाल से विधायक व मंत्री भी कल मीडिया से हो सकते हैं मुखातिब

सूत्रों से जानकारी मिली है कि  वर्तमान सरकार में भोपाल के विधायक और मंत्री जिनका छोटे-छोटे मामलों में हर क्षेत्र में दखल तक रहता है वह  इस्तीफा देने का मन बना रहे हैं । हो सकता है कल सुबह वह मीडिया के सामने अपनी बात रखें । वह भी यहां के दबाव से परेशान हो चुके हैं इसलिए वह सिंधिया जी के साथ हो सकते हैं।

15 विधायक अभी ओर हो सकते हैं  बागी

सूत्रों की माने तो वर्तमान में  भोपाल सहित अन्य क्षेत्र के कांग्रेस के 15 विधायक भी सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं । यह भी एक ही गुट के हैं। यह भी सरकार में रहते हुए भी त्रस्त हैं । 

दिग्विजय सिंह का पुत्र मोह के चलते बने सभी केबिनेट मंत्री

सूत्रों की जानकारी अनुसार प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में जो चल रहा है उसके जन्मदाता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह है। उन्होंने अपने पुत्र मोह में मंत्री बनाते समय सभी केबिनेट मंत्री बनवाये  कोई भी राज्य मंत्री नहीं बना। ऐसा मध्यप्रदेश हो या अन्य राज्य में अभी तक देखने को नहीं मिला। सभी 21 मंत्रियों को कैबिनेट ही क्यों बनाया गया। सिर्फ अपने पुत्र जयवर्धन सिंह को भविष्य में इससे नीचे का मंत्री ने बनाया जाएगा और या फिर गणित बेठ गया तो सीधे मुख्यमंत्री बनेगा । इसीलिए वरिष्ठ विधायक जो 7 बार चुनाव जीतकर आये उन्हें दरकिनार करते हुए अपने पुत्र और भांजे को मंत्री बनवाया। ओर तो ओर भाई तक को दरकिनार कर दिया।

सिंधिया की अनदेखी

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बने हुए 15 माह हो गए । कमलनाथ ने मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष का पद भी संभाल रखा था जबकि सिंधिया के पास कोई पद नहीं था।और उन्हें  प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की मांग समर्थकों ने दिल्ली तक उठाई थी। उसके बाद भी कमलनाथ ने अध्यक्ष का पद नहीं छोड़ा । अब जब राज्यसभा के सदस्य की बारी आई तो दिग्विजय सिंह तैयार हो गए ओर उनके समर्थन में कमलनाथ भी खड़े हो गए। जब सिंधिया के पास कोई पद ही नहीं रहेगा तो फिर वह करेंगे क्या। 

जनता ही नाराज 

जनता व कर्मचारियों को संतुष्ट नहीं कर पाए। अपने वचनपत्र को पूरा करने में आर्थिक परेशानियों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री की दखलंदाजी भी महत्वपूर्ण रही। जनता के सामने जाने में प्रतिनिधि भी असहज महसूस करने लगे। पूरी तरह से इस मामले में दोषी देखा जाए तो सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री ही हैं उन्होंने हमेशा सरकार को लेकर दखल देते रहे हैं ।जबकि सभी को मालूम है कि जनता दिग्विजय सिंह को बिल्कुल पसंद नहीं करती उसके बाद भी कमलनाथ उनके इसारे पर सरकार चला रहे हैं। यह हम नहीं यहां की जनता का कहना है। यही सब कारण हैं कि आज कमलनाथ को व कांग्रेस को सरकार से हाथ धोना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नर  प्रदेश  की जनता को वह  10 साल दिए जिसकी वजह से काँग्रेस से नफरत हो गई थी।