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दो विधायकों के स्तीफ क्यों नहीं किए मंजूर,26 मार्च तक विधान सभा स्थगित
March 16, 2020 • Admin
 
कोरोना वायरस का लिया बहाना
सरकार बचाने में विधान सभा अध्यक्ष कर रहे हैँ भेदभाव
भोपाल। आज से शुरू हुई विधानसभा का सत्र राज्यपाल के उद्बोधन व शोक सभा के बाद 10 दिन के लिए स्थगित कर दी गई। जिससे अभी कमलनाथ व कांग्रेस के नेतृत्व को  कुछ राहत मिली है। वही जिन दो विधायकों ने अपना इस्तीफा दिया उसे मंजूर नहीं किया गया है। 
प्रदेश सरकार ने कोराना वायरस की आड़ में अपनी सरकार को 10 दिन के लिए तो बचा लिया है। विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले राज्यपाल का उद्दबोधन पहली बार एक मिनिट में समाप्त हुआ है। उसके बाद विधान सभा को कोरोना वायरस को लेकर 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। विधान सभा में कोरोना वायरस कोई ठोस कारण नहीं माना जा सकता है। आज सरकार को अपने बहुमत को एक बार फिर साबित करना चाहिए था लेकिन वह स्थिति उत्पन्न होती उससे पहले ही स्थगन की घोषणा कर दी गई। प्रदेश की जनता की किसी भी राजनीैतिक द को नहीं है पक्ष विपक्ष दोनों ही अपने पार्टी के हितों को सर्वोपरि मान कर चल रहे हैं। आखिर क्यों बजट सत्र के लिए शुरू हुई विधानसभा को स्थगित करना पड़ा। सिर्फ कोरोना वायरस का बहाना ही काफी था।
अध्यक्ष का भेद भाव पूर्ण रवैया 
कांग्रेस के 22 विधायकों ने अपने सहयोगियों के द्वारा विधानसभा की सदस्यता से अपने इस्तीफे स्पीकर के पास पहूंचाये थे। जिनमें से सिर्फ 6 इस्तीफे  केबिनेट मंत्रियों मंजूर किए गए। अन्य विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने के लिए स्पीकर ने उपस्थित होने का कहकर नामंजूर कर दिए। वहीं जानकारी अनुसार दो कांग्रेस के विधायकों ने स्वयं उपस्थित होकर इस्तीेफे दिए गए थे तो फिर उन्हें मंजूर क्यों नहीं किया गया। हालांकि यह विशेष अधिकार स्पीकर के पास सुरक्षित है कि वह मंजूर कर ना करे। लेकिन यहां पर सरकार अल्प मत में प्रतीत हो रही है। जिसे बचाने के लिए अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर इस्तीफे मंजूर नहीं किये जा रहे हैं और उपस्थित होने का बहाना बनाया जा रहा है। लेकिन यह कब तक चलेगा आखिर जब उन्होंने सरकार अलग होने का मन बना लिया  है तो फिर और 10 दिन बाद भी यही स्थिति रहेगी। 
दोनों दलों के नेताओं की मिली भगत 
सूत्रों की माने तो यह बजट सत्र को बढ़ाने की योजना पहले से ही सरकार के मुखिया और विपक्ष के आपसी मतभेद के चलते रची गई थी। यह कहनामुश्किल है कि कौन इस मामले मेे शामिल है। हां यह तय है कि जो भी विपक्ष मिला हुआ है वह यह अच्छी तरह जानता है कि अपने विराधी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहता है। उसी का परिणाम है कि कोरोना वायरस के बहाने 10 दिन तक विधानसभा सत्र बढ़ाया गया है। 
कमलनाथ बचा सकते हैं बहुमत
यह दस दिन कमलनाथ के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और उन्हे अपनी सरकार बचाने के लिए एक मौका मिला है। कमलनाथ अपने विधायकों को जो इनसे नाराज बताए जाते हैं या निर्दलीय, सपा, बीएसपी व भाजपा को अपने साथ मिला सकते हैं। वह किसी भी स्तर पर जाकर कोशिश की जा सकती है या की जाएगी और शायद एक बार फिर उनकी सरकार को जीवन दान मिल सकता है। हालांकि कमलनाथ का बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से घनिष्ट संबंध हैं और उनसे मिलकर सरकार बचाने में कामयाब हो जायें।