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गौहरगंज में सामने आई पटवारी उमेश शर्मा एवं राजस्व निरीक्षक शुभा मरकाम की खुलेआम गुंडागर्दी
September 23, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

डंडे के बल पर किसान को कर दिया उसकी जमीन से बेदखल

भोपाल। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सूबे के किसानों को संपन्न बनाने का राग अलाप रहे हैं वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग के अफसर उनकी इस मंशा को पलीता लगाने से कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं । प्रदेश की राजधानी से सटे रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक किसान गंगाराम कि साढ़े 4 एकड़ जमीन पर खड़ी धान की फसल के बीच राजस्व निरीक्षक शुभा मरकाम एवं पटवारी उमेश शर्मा ने कुछ गुंडों के साथ मिलकर तहसीलदार के आदेश का ऐसा पालन किया कि एक वास्तविक किसान को उसकी ही जमीन से बेदखल करते हुये किसी अन्य को जमीन  सौंप दी । मुख्यमंत्री को दिए एक शिकायती आवेदन में रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील के ग्राम घाटखेड़ी निवासी गंगाराम ने लेख किया है कि राजस्व विभाग के अफसरों ने जानबूझकर षड़यंत्र रचते हुए मुझे मेरी जमीन से इसलिए बेदखल कर दिया क्योंकि न मेरी कोई राजनीतिक रसूख है और न इन अफसरों को पहुंचाने के लिए पैसे। 

किसी का कब्जा, किसी को नोटिस 

इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि गौहरगंज तहसीलदार संतोष बिठौरिया ने जिस साढ़े 4 एकड़ जमीन से 7 सितंबर 20 को राजाराम मीणा की बेदखली 21 सितंबर को सुबह 9 बजे करने का आदेश दिया, उस जमीन पर गंगाराम मीणा का सन 1980 से कब्जा चला आ रहा है और वह उस पर खेती भी कर रहे हैं। जबकि राजाराम मीणा तो विगत 10 साल से रायसेन में रह रहे हैं। इसके बाद भी तहसीलदार संतोष बिठौरिया से लेकर राजस्व निरीक्षक शुभा मरकाम एवं पटवारी उमेश शर्मा ने षड़यंत्र रचते हुए राजाराम के रायसेन स्थिति मकान में इसी शनिवार 19 सितंबर को नोटिस चस्पा किया। क्योकि उस दिन और अगले दिन अवकाश था। सोमवार को सुबह 9 बजते ही सारी तैयारी के बीच मंडीदीप से बुलाए गुंडों के बल पर गंगाराम की जमीन पर जबरन कब्जा करवा दिया। 

दूसरे खेत में जाने का रास्ता 3 जगह से किया बंद 

घाटखेड़ी ग्राम में पटवारी उमेश शर्मा और राजस्व निरीक्षक शुभा मरकाम की गुंडागर्दी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कृषक गंगाराम कि साढे़ 4 एकड़ जमीन का कब्जा दूसरे को सौंपने के बाद उन्होंने गंगाराम की दूसरी जमीन पर जाने के रास्ते तीन तरफ से बंद कर दिए ताकि गंगाराम परेशान होकर उन जमीनों को भी छोड़ने के लिए मजबूर हो जाए, जिन पर अभी उनका कब्जा है। जिन राजस्व अफसरों को जमीनी विवाद के मामले निपटाने के लिए तैनात किया गया है वही अब चंद रुपयों की खातिर गरीब किसान की पेट पर लात मारने में उतारू हैं।