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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का ट्रायल रोके जाने के पीछे चीन का हाथ: डब्ल्यूएचओ
May 26, 2020 • Admin • अंतर्राष्ट्रीय

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोविड-19 के मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अस्थायी तौर पर रोकने का फैसला किया है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि इस दवाई से कोरोना मरीजों को फायदा होने के बजाए ज्यादा नुकसान है। डब्ल्यूएचओ के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं और इसे चीन से जोड़ रहे हैं। खास बात ये है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विश्व संस्था पर चीन की तरफदारी का आरोप लगा चुके हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनियाभर के रिसर्च प्रकाशित करने वाली मशहूर पत्रिका द लैंसेट ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने वाले कोरोना मरीजों के मौत की संख्या एचओसी नहीं लेने वाले मरीजों की संख्या में ज्यादा है। केवल हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर ही रोक ने 17 देशों के 3,500 कोरोना मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ट्रायल के लिए शामिल किया था। विश्व संस्था ने इसे स्शद्यद्बस्रड्डह्म्द्बह्ल4 ञ्जह्म्द्बड्डद्य का नाम दिया था। इस ट्रायल का मकसद कोविड-19 के इलाज के लिए दवाई ढूंढना था। ट्रायल में शामिल मरीजों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या कोविड-19 के इलाज के लिए प्रयोग किए जा रहे तीन और अन्य दवाओं का रैंडमाइज्ड ट्रायल शुरू किया जाता था। लेकिन केवल हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर ही रोक लगाई गई है। चीन की तरफ उठी उंगुली विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस फैसले के पीछे सोशल मीडिया पर लोग चीन का हाथ बता रहे हैं क्योंकि बाकी किसी अन्य ड्रग के ट्रायल पर रोक नहीं लगी है बल्कि भारत में बनने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर रोक लगी है। नेल्सन एफ सिल्वा नामक एक ट्वीटर यूजर ने लिखा प्रिय राष्ट्र्रपति डोनाल्ड ट्रंप। चीन ने अपने लैब में कोरोना के इलाज के लिए वैक्सीन की खोज कर ली है। और इसके परिणामस्वरूप डब्ल्यूएचओ ने चीन के आग्रह पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर रोक लगा दी है।