ALL शिक्षा मध्यप्रदेश मनोरंजन राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य खेल राजनीति
हिंदी विश्वविद्यालय में हुये महिला सशक्तिकरण केन्द्रित व्याख्यान, नाटक और कविता पाठ
March 6, 2020 • Vijay sharma

भोपाल। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में कविता पाठ, नृत्य और नाटक मंचन के साथ ही महिला सशक्तिकरण विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा महिला केन्द्रित रही। व्याख्यान में वक्ता के रूप में शामिल महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त संचालक  तृप्ती त्रिपाठी ने महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही शासन की योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। 
 हिंदी विश्वविद्यालय में शुक्रवार को छात्रों द्वारा महिला सशक्तिकरण पर आधारित स्वरचित काव्य पाठ की प्रस्तुति दी गई। वहीं, नाटक विभाग के विद्यार्थियों ने स्त्री सौंदर्य और उसकी असीम प्रतिभा को प्रदर्शित करते हुये साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी का मंचन किया। कार्यक्रम में उपस्थित संयुक्त संचालक तृप्ती त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव जाति का अस्तित्व स्त्री से हुआ है। इसीलिए नारी को सृजन शक्ति की उपमा दी जाती है। उन्होंने बताया कि बेटी के जन्म से ही सरकार की कई योजनाएं नारी को सुदृृढ़ बनाने के लिये चलाई जा रही हैं। श्रीमती त्रिपाठी ने बताया कि प्रकृति ने महिला-पुरुष को बनाने में कोई भेदभाव नहीं किया। लेकिन समाज की समानता में भेदभाव संबंधी परंपराओं के कारण महिलाएं कई क्षेत्रों में आज भी पुरुषों से पीछे हैं। उन्होंने बताया कि जेंडर एक सामाजिक अवधारणा है, जबकि सेक्स वैज्ञानिक आधार। समाज को जेंडर में समानता के लिये अपनी सोच और पूर्वाग्रह बदलने की आवश्यकता है। वक्ता श्रीमती तृप्ती त्रिपाठी ने करवाचौथ का उदाहरण देते हुये कहा कि आज बाजार भी महिला केन्द्रित हो गया है। उन्होंने हरियाणा का संदर्भ देते हुये बताया कि लिंगानुपात में असमानता होने के कारण दूसरे राज्यों की लड़कियों से शादी करने की बजह से सामाजिक व्यवस्था और स्वास्थ्य के साथ शारीरिक बदलाव देखने में आ रहे हैं। नारी सशक्तिकरण के बारे में बताते हुये वक्ता ने स्त्री के प्रति तिरस्कार का भाव त्यागने के साथ महिला को कानूनी जानकारी देने और परिवार की इज्जत के बोझ से मुक्ति देकर उसे परिवार का आत्मसम्मान बनाने की मानसिकता जरूरी बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण एक गंभीर और चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि महिला अपने जीवन में दो परिवारों को संभालती और सशक्त बनाने के साथ संस्कार देने का काम करती है। उन्होंने भगवान शंकर के अर्धनारीश्वर रूप की अवधारणा को महिला पुरुष समानता का उदाहरण बताया। प्रो. भारद्वाज के मुताबिक सिर्फ कानून से नारी सशक्तिरण संभव नहीं है, इसके लिये समाज को भी आगे आकर अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. विजय सिंह ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुये बताया कि सन् 1910 में अमेरिका के न्यूयार्क शहर से महिला सशक्तिकरण के बीज पड़े। उन्होंने बताया कि प्रकृति ने इंसान और पशु पक्षियों की रचना में समानता का भाव रखा। लेकिन मानव समाज ने अपनी रूढ़िवादी परम्पराओं के कारण स्त्रियों के साथ भेदभाव का वर्ताव किया। इस अवसर पर प्रो रेखा राय, डॉ भावना ठाकुर, वित्त अधिकारी ऊषा सरयाम के साथ सभी शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।