ALL शिक्षा मध्यप्रदेश मनोरंजन राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य खेल राजनीति
जारी है दिग्विजय सिंह की घेराबंदी की राजनीतिक नौटंकी
June 19, 2020 • Admin

भोपाल। ऐसा लगता है कि भाजपा ने तय कर रखा है कि मध्य प्रदेश की राजनीति प्रदेश के चार दिग्गज सर्व श्री शिवराज सिंह चौहान, ज्यों तिरादित्य राजे सिंधिया, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के चौखुटे. में वांघ कर रखने की नाटक / नौंटकी दिखाकर कब्जे में रखना चाहती है लेकिन ऐसी राजनीति. से दुसरे भाजपा और कांग्रेस के सर्वश्री नरेन्द्र सिंह तोमर . प्रहलाद पटेल , कैलाश विजय. बर्गीय, उमा भारती , अजय सिंह राहुल, कांतिलाल चुरिया. यादि को कबतक किनारे रखा जा सकेगा, यह भी एक यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है। भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के विरुद्ध मुकदमा कायम करवाकर तथा दलित कांग्रेस का राज्य सभा. प्रत्याशी . फूल सिंह.वरेया को प्रथम वरियता. प्राप्त प्रत्याशी घोषित करने की मांग / सलाह देकर ऐसे ही राजनीतिक नौंटकी का प्रदर्शन किया है। राज्यसभा चुनाव को लेकर फूलसिंह बरैया के नाम पर जहां कांग्रेसजनों का एक वर्ग पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की घेराबंदी करने की कोशिश कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर भाजपा ने भी दलित वोटों को लामबंद करने के लिए इसे हवा देने की रणनीति बनाई है। इससे पहले कि ऐसे लोगों के मंसूबों का गुब्बारा पूरी तरह फूल पाता प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी उपाध्यक्ष चन्द्रप्रभाष शेखर ने उसमें पिन चुभोकर हवा निकाल दी और कहा कि दिग्विजय सिंह ही प्रथम वरीयता के उम्मीदवार हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा के मैदान में होते हुए भी दलित मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर कुछ अधिक था और उन्हें भाजपा अपने पाले में लाने की कोशिशों के तहत कांग्रेस के दलित प्रेम को अपने ढंग से आइना दिखाने की कोशिश कर रही है। 16 ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें सीधे-सीधे प्रतिष्ठा और साख ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा कमलनाथ की दांव पर लगी है अब चुनाव नतीजों के बाद ही यह पता चलेगा कि मतदाता किसे प्राणवायु देते हैं और किसके अरमानों पर पानी फेर देते हैं। कांग्रेस के द्वारा ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से जहां तीखा हमला किया जा रहा है तो वहीं पार्टी छोड़कर गये विधायकों के निशाने पर कमलनाथ कम दिग्विजय सिंह अधिक हैं। हालांकि इस रणनीति से चुनावों में कोई फायदा दलबदल करने वाले विधायकों को नहीं मिलेगा क्योंकि चुनाव तो कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरों के इर्द-गिर्द ही होना हैं। दिग्विजय सिंह की घेराबंदी करने की राजनीति कांंग्रेस के जिन लोगों को रास आती है वे ही अंदरखाने इसको हवा दे रहे हैं। कांग्रेस अभी तक सामान्तय: ट्वीटर और सोशल मीडिया पर ही सक्रिय है जबकि भाजपा ने मैदानी स्तर पर अपनी तगड़ी जमावट करते हुए असंतुष्टों को सहेजने का पूरा-पूरा प्रयास किया है। असंतुष्टों को मनाना कितना कठिन हो रहा है इसका अंदाजा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कथित आडियो और वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह केे नाम का सहारा लेना पड़ा था। बताते चलें कि यह ऑडियो वीडियो इंदौर में सांवेर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं को सबोधित करते हुए बताया गया है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है अक्सर यह बात देखने में आई है कि चुनावी समर में पहुंचने से पूर्व उसके नेता पहले आपस में ही हिसाब-किताब पूरा कर लेते हैं और फार्मूले कई बार किसे काटना है और किसे फायदा पहुंचाना है इसे ध्यान में रखकर ही बनाते हैं। जहां तक विधानसभा उपचुनावों का सवाल है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इस बात के लिए आश्‍वस्त हैं कि उनकी सरकार को खरीद-फरोख्त कर गिराया गया है और जनादेश का अपमान किया गया इस कारण मतदाता कांग्रेस को ही जितायेंगे ၊लेकिन यह इतना आसान नहीं है क्योंकि एक तो सिंधिया कांग्रेस में नहीं हैं और दूसरे इस अंचल के बड़े नेता नरेंद्र सिंह तोमर व राज्य के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी काफी सक्रिय रहने वाले हैं। कांग्रेस के पास अब यदि इस अंचल में कोई बड़ा नाम बचा है तो वह दिग्विजय ही हैं। उम्मीदवारों के चयन के नाम पर कांग्रेस जो कुछ कर रही है और जो खबरें बाहर आ रही हैं उसमें यह देखने को मिला है कि आपस में कुछ मुद्दों पर टकराहट हुई है, खासकर पुरातत्व संग्रहालय से झाड़-पोंछ कर उम्मीदवार बनाने की कोशिशें हो रही हैं। जानकार लोगों का यह दावा है कि कांग्रेस ने अपनी पक्की संगठनात्मक जमावट कर ली है। भाजपा के सामने एक बड़ी समस्या यह है कि दलितों के भारत बंद के आह्वान के दौरान जो हिंसक घटनाएं हुईं और उसके बाद सरकार ने जिस ढंग से गिरफ्तारियां कीं उससे दलित रुष्ट थे और उन्होंने थोकबंद होकर कांग्रेस को वोट दिए, इसके कारण ही बसपा को भी इस अंचल में अपेक्षाकृत मतदाताओं ने काफी कम वोट दिए और उनका झुकाव कांग्रेस की ओर रहा। यही कारण है कि इस अंचल में कांग्रेस को अच्छी-खासी सफलता भी मिली၊भाजपा अच्छी तरह समझती है कि दलित मतदाताओं को अपने पाले में फिर से लाना है तो कुछ अधिक प्रयास करना होंगे। कांग्रेस के कुछ नेता हमेशा दबे-छिपे स्वरों में दिग्विजय सिंह को निशाने पर लेते रहे हैं क्योंकि राज्यसभा चुनाव में प्रथम वरीयता का उम्मीदवार उन्हें बनाया गया है तथा दूसरी वरीयता का उम्मीदवार फूलसिंह बरैया हैं। पहले यह बात दबे स्वरों में कांग्रेसजनों ने की कि उपचुनाव को देखते हुए दलित मतदाताओं में यदि उनके स्थान पर बरैया को प्राथमिकता दी जाती तो यह चुनावी गणित से कांग्रेस के माफिक रहेगा। अब चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी बार-बार यह कह रहे हैं कि दलितों को साधने के लिए दिग्विजय खुद त्याग करें क्योंकि उन्हें राजनीति में काफी कुछ मिल चुका है और बरैया को प्रथम वरीयता का उम्मीदवार बनाया जाए। राकेश जिस ढंग से बोल रहे हैं उससे लगता है कि कहीं न कहीं से उन्हें कांग्रेस के भीतर से ही शह मिल रही है और वे अपने आपको मेहगांव से कांग्रेस का उम्मीदवार मान बैठे हैं, जबकि अभी तक उन्हें विधिवत रुप से कांग्रेस की सदस्यता नहीं मिली है और उनका खुद का मामला अधर में लटका हुआ है। पहले उनके प्रवेश का मामला हल होगा उसके बाद आगे की बात होगी। ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक चुनावी सभा में उन्होंने कांग्रेस प्रवेश की घोषणा की थी। कांग्रेस हाईकमान ने अभी तक उन्हें सदस्य बनाने की पुष्टि नहीं की है। जहां तक भाजपा का सवाल है उसके बड़े नेता यह महसूस करते हैं कि उन्हें असली खतरा दिग्विजय सिंह के सक्रिय होने से ही है क्योंकि आज भी वे कांग्रेस के अंदर कार्यकर्ताओं के बीच एक बड़े स्थापित नेता हैं जिनकी बात और प्रयासों को वजन देते हैं। जहां तक भाजपा का सवाल है वह कहीं से घाटे में नहीं रही। एक तो विद्रोही विधायकों को पार्टी में लाकर वह सत्ता में आ गयी और दूसरा राज्यसभा की एक और सीट उसे बोनस में मिलने की संभावना पैदा हो गयी है। चूंकि पिछले विधानसभा चुनाव में ग्वालियर-चम्बल संभाग में एक प्रकार से भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था इसलिए उसे अब फिर नये सिरे से वहां जमावट करने का अवसर मिल गया है और उसने बरैया का नाम उछाल कर दलितों में अपना आधार बढ़ाने की तैयारी शुरु कर दी है। कांग्रेस की घेराबंदी की जा रही है और दिग्विजय सिंह को भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा यह नसीहत दी जा रही है कि वे दलित के लिए अपनी सीट छोड़ दें। हालांकि जहां तक बरैया का सवाल है वे ही कुछ माह पूर्व जब यह मामला उठा था यह कह चुके थे कि राष्ट्रीय राजनीति में दिग्विजय सिंह की उपयोगिता अधिक जरुरी है और वे राज्य की राजनीति में रहना पसंद करेंगे,၊ कांग्रेस के अंदरुनी सूत्रों से भी यह खबरें यदाकदा छनकर बाहर आ रही हैं कि कांग्रेस नेतृत्व में इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है। इसका कारण यह है कि कांग्रेस में कुछ नेता यह मानते हैं कि इससे उपचुनावों में पार्टी को फायदा मिलेगा। आप जो बोते हो बही काटते हो।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया में घूमा है।भाजपा नेताओं ने इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ शिकायत की है।भोपाल पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है। यह वीडियो ठीक उसी तरह का है जैसा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पिछले कुछ सालों से चल रहा है।बड़े बड़े भाजपा नेता इस कथित वीडियो का हवाला देते रहे हैं। तब राहुल को पप्पू सावित करने के लिए उनका एक वीडियो एडिट करके चलाया गया था।वह आज भी चलाया जा रहा है।उस वीडियो में राहुल को आलू से सोना बनाने की मशीन का जिक्र करते हुये दिखाया गया है।जबकि वह अपने भाषण में वर्तमान प्रधानमंत्री के एक भाषण का ज़िक्र कर रहे थे।इस वीडियो ने राहुल को पप्पू सावित करने में भाजपा की बहुत मदद की।भक्त उसे आज भी सच मानते हैं। ऐसा ही शिवराज के साथ हुआ है।जब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नही थे तब उन्होंने राज्य सरकार की शराब नीति की आलोचना की थी।उस वीडियो को एडिट करके यह दिखा . तरह हाथ पैर मार रही है उसे देखते हुए आम आदमी को यह वीडियो सच ही लगेग၊ अब जो हुआ सो हुआ।जो दूसरों के साथ करते हो वह जब अपने साथ होता है तो कितना दर्द होता है इसका अहसास भाजपा को आज अच्छे से हुआ है।इसी बजह से उसके नेता पुलिस की शरण में गए हैं। प्रत्युतर में दिग्विजय सिंह पहुंचे क्राइम ब्रांच थाने. पहुंचकर मुख्यमंत्री के विरुद्ध आरोप पत्र सौ प अIये I उन्होंने अपने बयान में कहा है किजैसे मेरे खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है वैसे शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ दर्ज की जाए एफ आई आर,अगर एफ आई आर दर्ज नहीं की गई तो आगे न्यायालय का विकल्प खुला हैं। विधायक दल की बैठक आगामी 19 जून, 2020 को संपन्न होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास पर कांगे्रस विधायक दल की बैठक संपन्न हुई၊बैठक को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि यह समय कोरोना महामारी के संकट का चल रहा है और हमारा प्रदेश भी इसकी चपेट में है। लाॅकडाउन की अवधि में आप सभी ने अपने-अपने क्षेत्र की जनता का भरपूर सहयोग किया है, उन्हें हर संभव मदद पहुंचायी, उनकी सेवा की, उसके लिए मैं कांगे्रस पार्टी की ओर से आप सभी का हृदय से आभारी हूं। अभा कांगे्रस के महासचिव श्री मुकुल वासनिक जी का मध्यप्रदेश कांगे्रस के प्रभारी बनने के बाद हमारे बीच में पहली बार आगमन हुआ है, मैं अपनी ओर से तथा प्रदेश कांगे्रस की ओर से उनका स्वागत करता हूं। आज हम सभी 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए यहां एकत्र हुए हैं। कांगे्रस पार्टी की ओर से दिग्विजयसिंह व श्री फूलसिंह बरैया अधिकृत उम्मीदवार हैं। हमारे बीच में कई नये विधायक भी है, इसलिए आज हमने उन्हें राज्यसभा चुनाव में अपना मतदान कैसे करना है, उसका प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा है। नवनियुक्त प्रभारी महा. सचिव. मुकुल वासनिक ने विधायकों की तारीफ कर बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आपने जिस प्रकार से अपनी एकजुटता का परिचय दिया वह सराहनीय है। मप्र में जिस प्रकार से भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर, प्रदेश की जनमत द्वारा चुनी कांगे्रस सरकार को गिराने के लिए प्रलोभन का खेल प्रदेश में खेला था, उसे आप लोगों ने नकारकर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन किया। आज मैं आप सभी के बीच में आगामी 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर आया हूं। उम्मीद करता हूं सभी विधायकगण भविष्य में भी इसी प्रकार एकजुटता का परिचय देंगे। विधायकों को मतदान को लेकर आवश्यक जानकारी कांगे्रस के चुनाव कार्य प्रभारी जे.पी. धनोपिया ने दी। इस अवसर पर बैठक में कांगे्रस पार्टी की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्वजयसिंह, फूलसिंह बरैया, अभा कांगे्रस के सचिवगण एवं प्रदेश प्रभारी सुधांशु त्रिपाठी, संजय कपूर, कुलदीप इंदौरा और सी.पी. मित्तल, पूर्व अध्यक्षम कांगे्रस कमेटी शकांतिलाल भूरिया तथा अरूण यादव और मप्र विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह राहुल भैया सहित कांगे्रस के विधायकगण उपस्थित थे।

 

 

sabhar : के दी सिंह