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जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल की सुदृढ़ व्यवस्था हो: कलेक्टर
June 9, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

 ग्रामों को मॉडल टाउन के रूप में विकसित करे

जल एवं स्वच्छता मिशन की प्रथम बैठक संपन्न

भोपाल। ग्रामीण व् दूर-दराज अंचलो में बसे ग्रामीणों तक शुद्ध और पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था के लिए सर्वाधिक सुखा ग्रस्त क्षेत्रों में हैंडपंप लगाए जाएँ साथ ही भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जाए। यह निर्देश कलेक्टर ने आज जल एवं स्वच्छता मिशन की प्रथम बैठक में उपस्थित अधिकारियों को दिए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जाए। जल जीवन मिशन पर आधारित ग्रामों को और अधिक विकसित किया जाए। ग्रामों का एक्शन प्लान तैयार कर ग्रामों को मॉडल टाउन के रूप में विकसित किया जाए जिससे गांव के दूर-दराज अंचलो और मजरे टोले तक पेयजल की समुचित व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा की इसके लिए पर्याप्त घरेलू नल कनेक्शन की स्थाई व्यवस्था कराई जाए।  सुधार समिति में सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते हुए बैठकें आयोजित कर हर घर तक घरेलू नल कनेक्शन की व्यवस्था की जाए। आमजनों की परेशानियों को ग्राम स्तर पर समिति गठित कर दुरुस्त की जाये। बैठक में सदस्य सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री बी.एस. बारस्कर ने जिले में पेयजल की वर्तमान स्थिति एवं वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल के लिए योजना एवं प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन, जिसका एक मात्र लक्ष्य वर्ष 2023-24 तक ग्राम के प्रत्येक परिवार को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से निरंतर एवं पर्याप्त मात्रा में (स्थाई) और उचित गुणवत्ता का जल प्रदाय करना है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 187 ग्राम पंचायतों के 485 ग्रामों में 140 नल-जल योजनाएँ संचालित है। जिले में कुल 1,01,989 ग्रामीण परिवार है। जिन में 15,159 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से जल प्रदाय किया जा रहा है। जो लगभग 14.87% प्रतिशत है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम अधोसंरचना के निर्माण और रेट्रो फिटिंग और नई योजनाओं का प्राक्कलन तैयार कर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित कर समय सारणी तैयार की जाये। उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र के साथ मिलकर जल जीवन मिशन के तहत ग्राम अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए कुशल मानव संसाधन का एक समूह तैयार किया जाए। इन्हे विशेष ट्रेनिंग दी जाकर पारिश्रमिक भुगतान और समग्र सहायता गतिविधि के लिए नियुक्त किया जाए। वास्तविक, भौतिक और वित्तीय निष्पादन की निगरानी मूल्यांकन के आधार पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम समिति के माध्यम से सूचना तंत्र विकसित किया जाये जिससे बाढ़, आपदा और सूखा ग्रस्त जैसी स्थिति निर्मित होने पर आवश्यक कदम उठाए जा सके। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों की शिकायतों का निराकरण भी किया जाये।