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कई नामी-गिरामी कंपनियों की परियोजनाएं संचालित भटक रहे स्थानीय बेरोजगार
February 29, 2020 • Vijay sharma

सिंगरौली।। भारत की ऊर्जा धानी सिंगरौली के नाम से प्रख्यात सिंगरौली जिले में जहां औद्योगिक परियोजनाओं की भरमार है वहीं स्थानीय युवा बेरोजगार नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं। नवरत्न कंपनी एनसीएल एनटीपीसी की बात छोड़ दी जाए तो भी आज की स्थिति में सिंगरौली औद्योगिक परियोजनाओं का गढ़ बना हुआ है। जहां एस्सार,रिलायंस, जेपी,  हिंडालको, एपी,महान कोल्ड एंड पावर लिमिटेड जैसी कंपनियां जिला मुख्यालय के आसपास अपनी परियोजनाएं डाली हुई है स्थानीय वासियों को छोड़ दिया जाए फिर भी विस्थापितों के घर पर दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं एक तरफ कंपनियां पुनर्वास पश्चात अच्छे आर्थिक व सामाजिक स्थिति को मजबूत करने का दावा करती हैं वही एनटीपीसी एनसीएल हिंडाल्को रिलायंस जेपी के पुनर्वास कालोनियों में देखा जाए तो गरीब विस्थापितों के लिए न तो रहने का घर न तो खाने की रोटी इस तरह की स्थितियां मुख्यमंत्री घोषणा अनुसार सिंगरौली में देखी जा रही हैं।।

प्रवेश तक की इजाजत नहीं

स्थानीय शिक्षित बेरोजगार अपने डिग्री डिप्लोमा लिए कंपनी के आसपास भटक रहे हैं जिन्हें परियोजना परिसर के अंदर प्रवेश करने की भी इजाजत नहीं है। पूर्व में भाजपा की सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सिंगरौली को सिंगापुर बनाने का वादा किया था उसके बाद भी सिंगरौली किसी लायक स्थिति में नहीं पहुंची वर्तमान कांग्रेस सरकार में भी 70% रोजगार देने का वादा फीका रह गया वही वास्तविक में सिंगरौली कि जो दशा देखने को मिल रही है उससे आने वाले समय में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भारी नुकसान हो सकता है। जिससे इसका असर सरकार पर पड़ने वाला है। ना सरकार ना प्रशासन ना जनप्रतिनिधि दे रहे ध्यान दर-दर भटकते बेरोजगार युवा आज सिंगरौली के स्थानीय बेरोजगार इस तरह भटक रहे हैं जैसे अब उनका कुछ सहारा ही ना रह गया हो क्योंकि राजनीतिक दलों के द्वारा बड़े-बड़े वादे कर वोट बैंक बनाने के लिए युवाओं को गुमराह कर अपने राजनीति चमका लेते हैं परंतु ना तो शासन प्रशासन ध्यान दे रहा है ना ही सरकार बेरोजगार युवाओं की ओर कोई  बड़ी कदम उठा रही है। औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय युवकों को रोजगार हेतु पहली प्राथमिकता दिए जाने की बात प्रदेश सरकार वर्तमान करती है जबकि परिजनों का अवलोकन किया जाए तो 25% परियोजनाओं में स्थानीय मजदूर की संख्या 15% की भी नहीं है इन कंपनियों में बाहरी मजदूरों की भरमार देखी जाती है।।