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कहीं कोरोना आतंकियों का दूसरा हथियार तो नहीं
April 1, 2020 • विजय शर्मा

भोपाल। कोरोना से पीड़ित दिल्ली पश्चिम में निजामुद्दीन मरकज मस्जिद या बंगलेवाली मस्जिद में हजारों की संख्या में ठहरे हुए पाए गए जिसमें 16 देशों के 500 से अधिक थे।जिसमें कोरोना वायरस पीड़ित भी शामिल  रहे। जहां से सैकड़ों जमातियों को कीरोना से पीड़ित पाया गया है। यह देश में सबसे अधिक संख्या में पाए जानेवाले कोरोना पीड़ित हैं। हद तो तब हो गई कि इन्होंने यहां की सरकार को इस मामले की भनक नहीं लगने दी। क्या यह आतंकवाद का दूसरा रूप है। क्या आतंकवदियों की देश के अंदर कोहराम मचाने की कोशिश तो नहीं कि गई है। इस मस्जिद में देश के अलग अलग राज्यों से सैकड़ों जमाती शामिल होने गए थे। उनको क्या मालूम कि यहां पर बड़ी संख्या में पहले से ही कोरोना के पीड़ित ठहरे हुए हैं ।वर्तमान में  18 सौ के आसपास कोरोना के संदिग्ध पाए गए हैं जिनमें 27 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं । यह तो वह हैं जो वहां से मिले हैं ।ऐसे सेकडों जमाती हैं जो सभी अपने  घर वापस हो गए हैं उन्हें मालूम ही नहीं है कि वह जमात से परिवार के लिए मोत लेकर आये है जिस महामारी ने दुनियां में तहलका मचा दिया हो वह इतनी हल्की तो नहीं है । आज सभी राज्यों में इन जमातियों की लापरवाही से हजारों की संख्या में कोरोना से पीड़ित होने की आशंका है। जिस तरह से इसे प्रायोजित किया गया है उससे यह संदेह होने लाजमी है कि कोरोना के सहारे आतंकियों के द्वारा मोत का खेल खेला गया हो। इस खेल में कुछ देश के ही गद्दार शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह जांच का विषय है । देश की इंटेलिजेंस को भी इस बात की जानकारी क्यों नहीं मिली। और अगर थी तो इतने दिन तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई।  अब जो भी आशंका हो वह तो ठीक है लेकिन आज देश में  तब्लीगी  जमात के कारण हजारों की संख्या में कोरोना के पीड़ितों में इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।फिलहाल तब्लीगी  जमात में आये विदेशी नागरिकों की जांच पर ही सचाई तब ही सामने आएगी, कि यह सोची समझी साजिश है या जमातियों की अनभिज्ञता । देश को संकट में  संकट में डाल दिया है। इसके लिए सभी गिरफ्तार जमातियों पर सख्त कार्यवाही होना चाहिए जिससे भविष्य में कोई इस तरह की लापरवाही न करे।