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कम से कम 21दिन का हो सख्त लॉक डाउन  तब ही कोरोना पर जीत संभव
July 25, 2020 • Vijay Sharma • अंतर्राष्ट्रीय


         कोरोना वायरस से संक्रमण के मरीजों की संख्या में प्रतिदिन देश ही नहीं विश्व में लगातार इजाफा होता जा रहा है।आज विश्व में दो करोड़ के आसपास कोरोना संक्रमितों के मरीज हो गए हैं । कोरोना वायरस ने एक महामारी का रूप धारण कर लिया है जिसके चलते लाखों व्यक्ति मौत के गाल में समा गए हैं। सभी विकसित देश इस महामारी के आगे नतमस्तक हो गए हैं। इस महामारी से बचाव के सभी उपाय बेकार साबित ही रहे है। सभी देशों ने लॉक डाउन करके भी देख लिया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकले जितने बचाव के उपाय किए गए यह उतनी तेजी ऑर फैलाना शुरू हो गया। आज भारत की बात की जाए तो यहां पर प्रधान मंत्री ने भी पूरे देश में एक साथ लोक डाउन करके देख लिया उसके बाद भी यहां पर संक्रमितों में कोई कमी नहीं हुई और उल्टे हजारों की संख्या में प्रतिं दिन कोरोना संक्रमितों की बढ़ोतरी होती गई। आज देश में 13 लाख के आस पास कोरोना मरीज हो गए है। इस महामारी में लॉक डाउन की वजह से आर्थिक तौर पर देश को हानि हुई है साथ ही गरीब व मध्यवर्गीय  परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं वहीं सोशल डिस्टेंस के चलते निजी क्षेत्रों में कार्य प्रभावित हुआ है।जिसके चलते आज हजारों लोगों की निजी क्षेत्राों की नौकरियां चली गई। वहीं करोड़ों रुपए राज्य व केंद्र सरकार के द्वारा राशन वितरण में खर्च हो गए । आगे अभी कितने दिन इस महामारी का प्रकोप रहेगा यह कहना बहुत ही मुश्किल है। भारत के साथ ही अन्य विकसित व विकास शील देश इस महामारी की वैक्सीन बनाने लें लगे हैं । पिछले चार माह में कोई नतीजा सामने नहीं आया है। हालांकि प्लाज्मा थेरेपी से कुछ हद तक उपचार करने अच्छे परिणाम आए हैं लेकिन यह पूरी तरह कारगर नहीं है। आज देश के हालात ऐसे हो गए हैं कि क्या गरीब क्या अमीर, क्या मजदूर, क्या राजनेता, यहां तक मंत्री भी इस  महामारी से अछूते नहीं रहे हैं। 
लॉक डाउन का पालन सख्त हो 
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश सरकार  या केंद्र सरकार ने सबसे आसान तरीका लॉक डाउन अपना लिया है जब भी सरकार को लगता है कि संक्रमण अधिक फेल रहा है लॉक डाउन लगा दो। इस लॉक डाउन से प्रदेश ही नहीं देश के हर राज्य की जनता त्रस्त हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि जनता लॉक डाउन के पक्ष में नहीं है। जनता भी चाहती है कि इस महामारी के लिए जो भी संभव हो उसका पालन सही हो। हमारे यहां पर लॉक डाउन का पालन ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है या यह कहा जाए कि प्रशासन करवा नहीं पा रहा है।
होना यह चाहिए कि जब भी लॉक डाउन लगाया जाए तो इस दौरान प्रशासन को सख्ती बरतने की जरूरत है। जैसे  लॉक डाउन के दौरान कोई पास जारी नहीं किया जाए। इस  दौरान सभी निजी व शासकीय कर्मचारियों को भी लॉक डाउन में शामिल किया जाए। डॉक्टर को जोन में बने फीवर क्लीनिक या जिला चिकित्सालय में ही रखा जाए व निगम कर्मियों को वार्ड कार्यालय में ही रहने की व्यवस्था की जाए। शहर में सिर्फ पुलिस दिखना चाहिए।  ऑर मेडिकल सहायता के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया जाए। शहर की जनता जब घरों में कैद रहेगी तो संपर्क ही समाप्त हो जाएगा । इस दौरान अगर कोई व्यक्ति अगर बीमार होता है तो उसका उपचार मरीज के घर पर ही किया जाए। और जिस परिवार में जांच उपरांत कोरोना पॉजिटिव पाए जाए उसका घर पर ही इलाज किया जाए।ऑर उसके घर पर बाहर से लॉक डाल दिया जाए।बाहर कोरोना का पर्चा लगा दिया जाए । उक्त संक्रमित के परिवार को जरूरत का सामान उपलब्ध कराए जाए। जरूरत पड़े तो एक पुलिस कर्मी या कोई भी कर्मचारी को घर के बाहर तेनात कर दिया जाता। अगर इस तरह से लॉक डाउन लगाया जाता है। ऑर समय सीमा 21 से 25 दिन तक होना चाहिए। यकीन मानिए अपने देश क्या पूरी दुनिया से कोरोना को समाप्त करने में सफल हो सकते है। क्यों की जब कोई व्यक्ति किसी के संपर्क में ही नहीं आएगा तो सोशल डिस्टेंस तो अपने आप ही हो जाएगा। वहीं साइंस कहता है कि लोहा पर 3 दिन, लकड़ी पर 2 दिन , कागज पर 24 घंटे कोरोना वायरस जीवित रहता है तो 21 दिन के लॉक डाउन में वह भी समाप्त हो जाएगा। इस पालन करने की लिए प्रशासन व सरकार को थोड़ा सख्त होना पड़ेगा । लेकिन परिणाम सकारात्मक अवश्य मिलेंगे। वरना आने वाले समय में  देश की आर्थिक  स्थिति बहुत ही खराब ही जाएगी जिससे उबरने में कई वर्ष लग जाएंगे, अभी विकासशील देश में गिनती हैं कहीं ऐसा ना हो पिछड़ों में शामिल हो जाए। सरकार को इस ऑर विशेष ध्यान देने की जरूरत। नहीं तो यह देश गरीबी व भुखमरी के गर्त में चला जाएगा