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कोरोना की महामारी, चिरायु पर मेहरबानी, जनता की जुबानी
April 30, 2020 • विजय शर्मा • मध्यप्रदेश
कोराना संक्रमितों के माध्यम से चिरायु को किया जा रहा है उपकृत
भोपाल। राजधानी में वर्षो से संचालित निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का उपचार कराने के आदेश प्रदेश सरकार के द्वारा किए गए हैं। जहां पर ज्यादातर मरीजों का ईलाज किया जा रहा है। जबकि राजधानी में एम्स के साथ ही दर्जनों शासकीय अस्पताल हैं जिनमें मरीजों को भेजा हीनहीं जा रहा है। जिससे करोड़ों रूपये का लाभ चिरायु अस्पताल को सरकार के द्वारा पहूंचवाया जा रहा है। 
आज देश में कोरोना महामारी का प्रकोप विगत एक माह से है जिसके चलते सैकड़ों संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इस महामारी में स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी भी अछूते नहीं रहे हैं। कोराना संक्रमण से बचाव को लेकर केन्द्र सरकार के द्वारा विगत 24 मार्च से लॉकडाउन घोषित किया गया है, जो अभी निरंतर बढ़ा कर जारी है। इस लॉकडाउन के दौरान कोरोना की लंबी लड़ाई को देखते हुए केन्द्र सरकार नेजनता के लिए राहत पैकज भी जारी किया है। जिससे जनता को राशन सामग्री के साथ ही अन्य किसी भी समस्या का सामना ना करना पड़े। वहीं इस लड़ाई में देश के उद्योगपति, अभिनेता, कर्मचारी व अधिकारी संगठन, सामाजिक संस्थाओं ने अपने स्तर पर करोडंों रूपये प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सहायता कोष में करोड़ों रूपये की आर्थिक सहयोग किया। जिससे कोरोना संक्रमितों के लिए जरूरी चिकित्सीय उपकरण व जनता को राशन सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। 
इस सहायता व केन्द्र सरकार के पेकेज का प्रदेश सरकार के मुखिया के द्वारा अपनों को उपक्रत करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमे सबसे पहले उन्होंने इंदौर रोड पर स्थित चिरायु निजी चिकित्सालय व बंसल चिकित्सालय में कोरोना संक्रमितों का इलाज के लिए राजधानी व इससे लगे जिलों को उपचार के लिए आदेशित किया गया। जबकि शहर में शासकीय अस्पतालों में इससे कहीं अधिक सुविधा व योग्य चिकित्सक मौजूद हैं। जिसमें सबसे पहले एम्स अस्पताल का नाम आता है। क्योंकि शहर में यही एक अस्पताल हैं जहां पर कोरोना संक्रमित की जांच के लिए नमूने भेजे जाते हैं। जहां पर देश के एक से एक चिकित्सक मौजूद हैं और वहां पर मरीजों को भर्ती करने के लिए पर्याप्त पलंग सहित अन्य सभी सुविधाएं मौजूद हैं। वहीं दूसरे नंबर पर हमीदिया चिकित्सालय, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के साथ ही एैसे एक दर्जन से अधिक हैं जहां पर कोरोना संक्रमितों का उपचार किया जा सकता था। लेकिन सिर्फ एक संस्थान को लाभ पहंूचाने के लिए सिर्फ दो अस्पताल चिन्हित किए गए है। प्रतिदिन 10 से 40 तक कोरोना संक्रमित मरीज निकल रहे हैं। जिन्हें चिरायु व कुछ को बंसल में ही क्वारेंटाईन किया जा रहा है। बंसल अस्पताल में मरीज के कहने पर ही भेजा जा रहा है वरना पूरी तरह से सरकार चिरायु को चिर+आयु का आशीर्वाद या कहें कृपा दृष्टि की जारही है।
इस तरह से विगत एक माह से अधिक समय हो गया जिसका बिल करोड़ों में पहूंच गया होगा। क्या सरकार यह व्यवस्था शासकीय अस्पताल में नहीं कर सकती थी। जिससे सरकार के राहत कोष का उपयोग अन्य समस्याओं के लिए किया जा सकता था। आज प्रदेश व देश की जनता को कोरोना संक्रमितों के लिए सहयोग करने के नाम पर ठगा गया है क्यों कि इस सहायता राशि का उपयोग चहेतों को उपक्रत करने में किया जा रहा है। महामारी का पूरा लाभ तो सरकार में बैठे नुमाईंदे उठा रहे हैं। पिछली सरकार में अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण कर भ्रष्टाचार किया गया वहीं इस सरकार में कोरोना के इलाज के नाम पर अपनों को उपकृत कर किया जा रहा है। सरकार कोई भी हो लाभ का मौका हाथ से कोई नहीं जाने देना चाहता।