ALL शिक्षा मध्यप्रदेश मनोरंजन राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य खेल राजनीति
कोरोना महामारी के बंद काल में वसुली का भारी विरोध
May 22, 2020 • Admin

विद्युत कंपनियों के खिलाफ उद्योगजगत ने खोला मोर्चा

भोपाल। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश की अगुवाई में प्रदेश भर के 150 औद्योगिक संगठनों ने कोरोना त्रासदी काल में बंद उद्योगों को विद्युत वितरण कंपनीयों द्वारा दिये जा रहे बिजली बिलों का भारी विरोध करते हुए कहा है कि जितनी बिजली उतना दाम ही देगें। प्रदेश के सभी संगठनों के अध्यक्ष एवं सचिवों ने ई धरने में जुड़कर अपने अपने विचार रखते हुए बिजली के भारी बिलों का विरोध किया। इस धरने में प्रदेश के लगभग 3000 उद्योगों ने ऑनलाईन झुम पर आकर अपना अपना विरोध जताया इसके साथ ही 450 से अधिक उद्योगों ने फेसबुक व यु टयूब अपना विरोध दर्ज कराया। धरना आंदोलन दो घंटे तक चला जहां विभिन्न उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किये तथा इन शुल्कों का विरोध किया। मुख्यमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन दिया गया जिसका वाचन एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाश जैन द्वारा वाचन किया गया। सांसद शंकर लालवानी ने ऑनलाईन जुडकर उद्योगों की बातों को सुना। एसोसिएषन की ओर से प्रदेश संयोजन भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के योगेश मेहता को ज्ञापन की प्रति सौपी गई। सांसद ने उद्योग जगत को आश्वस्त किया कि वे मुख्यमंत्री एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा से चर्चा कर उद्योगहित में निर्णय करावेगे। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया द्वारा सभी संगठनों की ओर से दोनों को ऑनलाईन ज्ञापन दिया गया तथा उद्योगहित में निर्णय कराने का निवेदन किया।अध्यक्ष प्रमोद डफरिया ने आगे कहा कि दो माह से बंद उद्योगों से विद्युत कंपनियों द्वारा सभी प्रकार के शुल्क की वसुली की जा रही है। इसमें सबसे प्रमुख रूप से फिक्स चार्जेस है, उद्योग जब संचालित ही नही हुए है तो फिक्स चार्जेस कैसे जबकि उद्योग षासन द्वारा ही बंद कराये गये है इसके बावजूद भी फिक्स चार्जेस की वसूली जारी है। कहने तो षासन ने फिक्स चार्जेस दो माह के लिए आगे बढा दिये है जो उद्योगजगत के हित में गलत निर्णय है तथा इस निर्णय का समस्त उद्योगजगत विरोध करता है तथा शासन से अपेक्षा करते है कि फिक्स चार्जेस त्वरित वापस लेवे। मिनिमम चार्जेस भी उद्योगों से लिया जा रहा है कई उद्योग इस बंद काल में अपनी युनिटो का उपभोग ही नही कर पाये है इस परिस्थति में यह आर्थिक भार उद्योगों पर लागू हो रहा है इसके लिए भी शासन से निवेदन है कि इस शुल्क में भी राहत प्रदान की जावें। तीसरा पावर फैक्टर पेनल्टी ली जा रही है यह एक तकनीकी समस्या है कि यदि उद्योग बंद है तो पावर फैक्टर मेंटेन नही कर सकते है। इसलिए पावर फैक्टर शास्ति को भी वापस लेने की मांग उद्योगजगत करता है। आज दो माह से बंद उद्योगों में फिक्स चार्ज के और न्यूनतम खपत के लाखों रू. के बिल आ रहे है। जबकि खपत 200 से 300 युनिट की है। बिना उद्योग संचालन के उद्योगपतियां को पहाड जैसे बिल आ रहे है। इसके अतिरिक्त बिना उद्योग चलाये लाईन लॉस मेन्टेन करने की पेनल्टी भी उद्योगों पर थोपी जा रही है। इन सब को जोडकर उद्योगपति पर बिजली का बिल इतना बडा बोझ षासन द्वारा डाला जा रहा है। अगर षासन फिक्स चार्ज, न्यूनतम बिल और लाइन लॉस तुरंत नही हटाया तो उद्योग आरंभ होने के पहले ही बंद हो जायेगे। जिन संगठन प्रतिनिधियों एवं उद्योगपतियों ने अपने विचार व्यक्त किये उनकी सूची संलग्न है। जो संगठन इस ई धरने में सम्मिलित हुए उनकी सूची संलग्न है।