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कोरोना संक्रमण के ऊपर भारी रेल्वे गार्ड्स का जज्बा
April 10, 2020 • Admin
परिवार व स्वास्थ्य की चिंता बगेैर लगे हैं सेवाएं देने
भोपाल। हमारी टीम इन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी उठा रहे रेल्वे के फौजी रूपी कर्मचारियों को कवर कर रही जिससे जनता को इन सच्चे कर्मचारियों के बारे में जानकारी हो सके इसी कड़ी में हमारी टीम भोपाल रेल्वे के मालगाड़ी गार्डों को कवर कर रही है और जिन गार्डों को कवर किया। 
रेलवे गार्डो की पारिवारिक दिनचर्या 
रात के 3 बज रहे हैं गार्ड अंशुमन बबेले को नींद नहीं आ रही थी काफी बेचैनी अनुभव हो रही थी वो उठे और अपनी बीमार माँ को जाकर देखा तो वो बुखार से तप रहीं थी उन्होंने अपने वृद्ध पिता को उठाया और तुरंत माँ के माथे पर बर्फ की पट्टी रखना शुरू की चूंकि कल से माँ बुखार में थी कोरोना के लॉक डाउन की वजह से डॉ घर नहीं आ रहे थे सिर्फ दवाई दी पर वो असर नहीं कि इसी बीच 4 बजे उनके फोन की घंटी बजी देखा तो लॉबी से उनकी ड्यूटी के लिए फोन है उन्होंने 6 बजे की अपनी गाड़ी बराबर की और अपने कमरे में जाकर तैयारी करने लगे तभी उन्हें किचिन से आवाज आई तो जाकर देखा तो उनकी बुखार में तप रही माँ उनके लिए टिफिन तैयार करने आ गयी थी उन्होंने तुरंत मना किया तो माँ रोने लगी उन्होंने अपना टिफिन बैग में रखा और अपने माता पिता को ईश्वर भरोसे छोड़कर वो अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ गए ड्यूटी पर पहुंचकर उन्होंने ड्राइवर से बातकर अपनी ड्यूटी का संचालन किया इस विषम परिस्थिति जिसमें सभी घर पर हैं रेल्वे गार्ड अंशुमन बबेले अपनी सफेद यूनिफार्म में एक फौजी की तरह अपना कर्तव्य निभा रहे जब हमारे रिपोर्टर ने उनसे पूछा तो वो बोले कि देश के प्रति कर्तव्य पहले उनसे उनके बारे में पूछने पर उन्होंने ये जानकारी दी लगभग 12 घंटे इन विषम परिस्थिति में ये गार्ड ड्यूटी करते हैं गार्ड इतने डरे हुए हैं कि अपने घर पहुंचकर परिवार ,बच्चों को प्यार भी नहीं कर पाते ऐसे ही एक और गार्ड सुदीप मालवीय भी अपनी ड्यूटी कर रहे 2 दिन पहले उनको भी कवर किया जब वो ड्यूटी से लौट रहे थे उन्होंने बताया कि 12 घंटे बाद वो अपने घर पहुंचेंगे शाम को 18 बजे गए अभी सुबह 7 बजे लौट रहे हैं और उनके घर भी अकेली वृद्ध मॉ और छोटा भाई है एक बहन है पूरी घर की जिम्मेदारी है और इन परिस्थितियों में घर पर जाने में भी डर लग रहा है माँ ब्लड प्रेशर ,शुगर की मरीज हैं कहीं कोई दिक्कत न आ जाए। गार्ड विवेक महूरकर है जिनके घर में अकेली वृद्ध विधवा माँ हैं वो भी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। रात के 11 बजे निकले थे जो सुबह 9 बजे लौटे। अपनी माँ से गले भी नहीं मिलते अपने सारे काम भी खुद करते कि कहीं माँ कोरोना पीडि़त न हो जाएं ,गार्ड विनय कुमार जिनका 2 साल का पुत्र अभी कुछ दिन पहले गिर गया था और कई दिन ड्यूटी में रहकर अभी घर आया अभी पूरी तरह ठीक नही और वो भी ड्यूटी कर रहे कल सुबह 4 बजे गए और शाम को 6 बजे 14 घंटे ड्यूटी करके लौटे।
रेलवे गार्डों ने 4 दिन के वेतन को किया था दान
रेलवे गार्डों की मुहिम हमारा हक 4200-5400 के वेसेरेम संघ के भोपाल मीडिया प्रभारी गार्ड रोमेश चौबे ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले रेल्वे के सभी गार्डों ने 4 दिन के वेतन के 65 करोड़ रुपये भी प्रधान मंत्री राहत कोष में दान दिए साथ ही पूरे जोन में कई जगह गार्डों द्वारा राशन,अनाज, भोजन भी कोरोना के कारण लॉक डाउन झेल रही जनता की मदद के लिए दिया है साथ ही व्यक्तिगत रूप से गार्ड स्वयं ही अपने कर्तव्यों के निर्वाहन के लिए आवश्यक सुरक्षा समान ग्लव्स,फेसमास्क, सैनिटाइजर साबुन आदि भी स्वयं ले रहे हैं और कई स्टेशन मास्टर वगैरह तो दूर से ही बात करते हैं कमरे में भी नहीं आने देते ऐसी ही बात पर एक गार्ड को कल आसनसोल में स्टेशन मास्टर द्वारा मारा भी गया गार्ड इन सब घटनाओं से डरे हुए हैं फिर भी अपना कर्तव्य पूर्ण निष्ठा से कर रहे हैं परंतु क्या देश की जनता को, रेल प्रशासन को गार्ड की महत्ता समझ आएगी जो एक फौजी की तरह अपना योगदान दे रहे संक्रमण झेल रहे एक गार्ड संक्रमित भी हो चुका है।