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कोरोना से बचाव के लिए व्यवहार परिवर्तन सभी अपनाएं: लवानिया
November 7, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

भोपाल । स्वास्थ सेवाएं महकमा और जिला प्रशासन में व्यापक रूप से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए व्यवहार परिवर्तन अभियान चलाया जा रहा है । कलेक्टर श्री अविनाश लवानिया ने बताया कि भोपाल हाई रिस्क ज़ोन में आता है क्योंकि भोपाल ने गैस पीड़ितों को संख्या भी अधिक है। ऐसे में कोरोना से खुद को और दूसरों को बचा कर रखना चुनौती पूर्ण कार्य है। इसी के चलते व्यवहार में परिवर्तन अभियान शुरू किया गया है। सर्दी के मौसम में रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन बढ़ जाते हैं। ये सीवियर एक्यू रेस्पिरेटिव इन्फेक्शन कहलाता है। इस तरह की बीमारियों का खतरा उन लोगों में बढ़ जाति है जिनकी इम्यूनिटी लो है, जिनकी उम्र अधिक है, जिन्हें को-मॉर्बिडिटी का खतरा हो । 

 

व्यवहार परिवर्तन अभियान का उद्देश्य

 

यह अभियान पूरी सहभागिता है। इसमें अंतर विभागीय समन्वय के साथ-साथ कम्युनिटी की सहभागिता जी आवश्यक है। इसे इस तरह से समझना है कि- पहला. वैक्सीन आएगी, तब आएगी और जब तक वैक्सीन हमारे हाथ में उपलब्ध नहीं है तब तक वायरस को हम अपने पास आने से कैसे रोकें? दूसरा अगर मेरे अंदर वायरस है तो उसे दूसरों तक फैलने से कैसे रोकें? ये दोनों ही हर जिम्मेदार नागरिक का व्यवहार होना चाहिए। यदि लगता है कि मुझे वायरस से बचना है तो जरूर मास्क पहनना चाहिए और मुझे लगता है कि किसी और में या मेरे आसपास वायरस का संक्रमण है तो भी हमे मास्क पहनना ही चाहिए। हमें यह स्वीकार करनाही होगा कि यह एक नॉर्मल पैटर्न है, जीने का। इसमें हम अपने मुंह और नाक जैसे रेस्पेरेटिव पैसेज को ढंक कर रखें जो कि वायरस के आने-जाने का सबसे आसान जरिया हैं।

 

कोरोना से खुद को और दूसरों को बचा कर रखना चुनौती पूर्ण कार्य है। इसी के चलते व्यवहार में परिवर्तन अभियान शुरू किया गया है। सर्दी के मौसम में रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन बढ़ जाते हैं। ये सीवियर एक्यू रेस्पिरेटिव इन्फेक्शन कहलाता है। इस तरह की बीमारियों का खतरा उन लोगों में बढ़ जाति है जिनकी इम्यूनिटी लो है, जिनकी उम्र अधिक है, जिन्हें को-मॉर्बिडिटी का खरता हो। को-मॉर्बिडिटी का अर्थ है किसी को डायबिटीज होना लंबे समय से, किसी को ब्लड प्रेशर होना, कैंसर जैसी बीमारी होना या ऐसी बीमारी हो जिसमें आपको इम्यून सप्रेसंस खाने पड़ते हों। चूंकि इम्यून सिस्टम बॉडी का बहुत हाईपर एक्टिव होता है तो उसे सप्रेस (दमन) करने के लिए सप्रेशंस दिए जाते हैं। विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए खतरा बहुत रहता है। आने वाले दिनों में हमें ऐसे बहुत केस मिल सकते हैं। ऐसा एपिडिमियोलॉजिस्ट और जो कम्युनिटी पर इन चीजों की निगरानी रखने वालों का भी अनुमान है। ऐसे में हमें यह समझ लेना चाहिए कि यदि हमें कोरोना से बचना है तो अपने व्यवहार में कुछ बेसिक परिवर्तन लाने ही होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में “व्यवहार में परिवर्तन अभियान” शुरू किया गया है।