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माफियाओं के द्वारा मोहखेड जंगल के अंदर नदियों से अवैध उत्खनन जारी, प्रशासन मौन
September 13, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

छिंदवाड़ा। वन विभाग की भूमि में बेधड़क रेत माफियाओं के द्वारा जंगल के अंदर नदियों से अवैध उत्खनन किया जा रहा है और इस पर ना तो प्रशासन की सख्ती काम आई और नाही खनिज विभाग की कार्यवाही वजह प्रशासन ने करवाई के लिए अब तक कोई ठोस रणनीति भी तैयार नहीं कर रखी है यही वजह है कि वन परिक्षेत्र मोहखेड के जंगलों से धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है और प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे हुए है नदी नालों के पास से जुड़े गांव के ग्रामीणों ने नाम ना छापने पर बताया कि रेत माफियाओं के साथ वन विभाग  के अधिकारियों का पूर्णता संरक्षण प्राप्त है तभी तो बेरोकटोक वन विभाग की भूमि से रेत का अवैध परिवहन हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारियों से इस बारे में बात करने पर हमेशा ही गोलमोल जवाब देते हुए अपने आप को अनजान बताते हुए दिखवा लेने की बात कहते हैं। बाजार में एक रेत की ट्राली से 1700 से 2000 रुपए की बिक्री हो रही है इस दौरान मजदूर एक ट्रॉली को भरने का ₹150 लेते हैं इसके अलावा रेत माफिया प्रति ट्रॉली 1200 से 1500 तक का मुनाफा कमाते हैं मजदूर लगातार रेत खोदकर उसे इकट्ठा कर लेते हैं ट्रैक्टर ट्राली आते ही जल्द उसे भरकर रवाना कर दिया जाता है !
मोहखेड क्षेत्र से बेधड़क धड़ल्ले से रोजाना 20 से 25 ट्राली अवैध रेत वन विभाग की भूमि से उत्खनन किया जा रहा है मोहखेड क्षेत्र से जुड़े जंगलों से ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध रेत का परिवहन जारी है यह रेत क्षेत्र सटे जंगल एवं छोटे बड़े नालों से निकाली जा रही है बताया गया कि इस रेत के कारोबार में फॉरेस्ट विभाग के बीटगार्ड का बड़ा योगदान बताया जा रहा है बाकी जिम्मेदारी डिप्टी रेंजर का संरक्षण प्राप्त है जिससे रेत का अवैध कारोबार चल रहा है इससे शासन को प्रतिदिन लाखों का नुकसान उठाना ही पड़ रहा है साथ ही जिले में बैठे अधिकारियों की भी छवि धूमिल हो रही है वन विभाग की जमीन से अवैध उत्खनन रोजाना हो रहा है लेकिन मोहखेड के वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी लोहांगी  में बनी वन विभाग की चौकी में रेत माफिया के साथ अधिकांश दोपहर के समय देखे जा सकते हैं जिससे यह साफ पता चलता है कि रेत माफियाओं को वन विभाग के द्वारा का खुला संरक्षण रेत परिवहन का दिया गया है
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले में लगभग 10 से 12 कारोबारियों के द्वारा कार्य का संचालन किया जा रहा है। यह मोहखेड क्षेत्र से सटे जंगलों के अंदर देवगढ के समीप कन्हान नदी और अन्य स्थानों से रेत निकाल कर सभी क्षेत्र में सप्लाई करते है। यह सारी चीजें जंगल विभाग के संरक्षण में है लेकिन अवैध कमाई के चक्कर में जंगल विभाग के अधिकारी इन माफियाओं को खुला संरक्षण दिए हुए हैं। वही मोहखेड के देवगढ के आस पास कहीं भी रेत की कोई भी खदान संचालित नहीं है आखिरकार अधिकारियों के द्वारा हमेशा ही गोलमोल जवाब देते हुए कहा जाता है कि वन विभाग की भूमि से रेत नहीं उठ रही है तो फिर रेत मोहखेड क्षेत्र में कहां से आ रही हैं.जिस में बड़ी मात्रा में रेत देखी जा सकती है और अगर ठेकेदारों से रॉयल्टी पूछी जाए तो साफ पता चल जाएगा कि रेत माफियाओं के द्वारा रेत कहां से लाई जा रही हैं और कौन कौन से विभाग का योगदान इन रेत माफियाओं को है अगर ऊपर बैठे अधिकारी इस पर संज्ञान लेते हैं तो राजस्व का एक बड़ा फायदा मोहखेड क्षेत्र से होता देखा जाएगा।
रेत के इस कारोबार से राजस्व को तो चूना लगा ही रहा है लेकिन कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारी आंख में पट्टी बांधकर सो रहे हैं ग्रामीणों ने बताया कि रेत का अवैध कारोबार अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा है जबकि वन विभाग के डिप्टी रेंजर जानकारी के बाद भी कार्यवाही नहीं करते हैं जंगल क्षेत्र में मनमाना रेत के अवैध उत्खनन से पर्यावरण को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन स्थानीय अधिकारी रेत माफियाओं के चंद रुपयों के टुकड़ों में बिके हुए नजर आ रहे हैं।
सूत्रों की माने तो जंगल विभाग द्वारा इस पूरे क्षेत्र का जिम्मा जिस अधिकारी को दिया गया है उस अधिकारी की रेत माफियाओं के साथ अच्छी सेटिंग है साहब का माफियाओं के साथ मैनेजमेंट इतना तगड़ा है कि आज तक इन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करने यह जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई माफियाओं ने फॉरेस्ट विभाग अधिकारियों की सेवा करके जैसे खुला संरक्षण ही ले रखा हो रेत निकालने की भी सेटिंग इतनी अच्छी बना ली है कि सुबह 5 बजे से 10 बजे तक इसके बाद जरूरत पड़ी तो दोपहर में 1 से 3 बजे तक का टाइम भी ले लिया है जबकि क्षेत्र में सड़कों के माध्यम से रेत सभी जगह जा रही है  इन रेत माफियाओं को खुला संरक्षण वन विभाग ने दे रखी है.