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मध्यप्रदेश सरकार ने लॉकडाउन के दौरान ई प्रोग्राम' के माध्यम से जारी रखी बच्चों की पढ़ाई
May 6, 2020 • Admin
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार राज्य में प्रारम्भिक और माध्यमिक स्तर की स्कूल शिक्षा में बदलाव लाने के लिए नीति आयोग, पिरामल स्कूल ऑफ लीडरशिप तथा बोस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप के साथ मिल कर साथ-ई कार्यक्रम पर काम कर रही है। इस पहल ने वैश्विक महामारी के दौर में बहुत अच्छा प्रभाव डाला है और इस तरह वर्चुअल तरीकों और अन्य माध्यमों से सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था में लर्निंग की शुरूआत हो सकी है।
राज्य सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया है कि लॉकडाउन के दौरान बच्चे शिक्षा से वंचित नहीं रहें। लॉकडाउन के दौरान 4 लाख शिक्षकों और 1 करोड़ छात्रों को डिजीएलईपी स्टडी मैटीरियल प्रदान किया गया। यह सामग्री ऑडियो-विजुअल और टैक्स्ट फॉर्मेट में है। इसके अलावा शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप और वॉट्सएप ग्रुप्स से जोड़ा गया। राज्य में बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए रेडियो और टेलीविजन कायक्रमों का भी सहारा लिया जा रहा है। विविध भारती पर एक रेडियो प्रोग्राम रेडियो स्कूल सुबह 11 से 12 बजे के दौरान प्रसारित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया था। इस तरह की पहल के जरिये लॉकडाउन के दौरान डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम में मध्यप्रदेश अग्रणी रहा है। मध्यप्रदेश ने पिछले तीन वर्ष में साथ-ई के तहत कई स्तरों पर व्यवस्था में बदलाव किया है। इसमें शिक्षण सामग्री का डिजिटल बैंक तैयार करना और तकनीक आधारित अकादमिक मॉनिटरिंग के साथ शैक्षिक अधिकारियों के लिए तकनीकी साक्षरता भी शामिल है। रेमेडिएशन प्रोग्राम्स के माध्यम से 2 लाख से अधिक
स्कूलों में साथ-ई ने कक्षा 1 से 9 तक की अध्ययन सामग्री को अपग्रेड किया है। कोविड लॉकडाउन में तकनीकी शिक्षा की ट्रेनिंग बहुत काम आ रही है। तकनीक आधारित समाधानों में सफलता के अलावा, राज्य ने इस कार्यक्रम के तहत व्यापक और महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। ''एक परिसर एक शाला'' अभियान के माध्यम से 34997 स्कूलों को 15961 परिसरों में समेकित किया गया साथ ही प्रबंधन और प्रशासन की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए ग्रेड और विषय के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता में सुधार किया गया। अभिभावक शिक्षक बैठकों के लिए अभियान ने सामुदायिक-विद्यालय संबंधों को मजबूत किया है, जिससे विद्यालय की गतिविधियों में
समुदाय के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी होती है।
पिरामल स्कूल ऑफ लीडरशिप की ओर से सुश्री संगीता ममगाईं ने इस पहल के बारे में कहा साथ-ई कार्यक्रम में हम नीति आयोग और बीसीजी के साथ साझेदारी करते हुए बहुत गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए मध्य प्रदेश ओडिशा और झारखंड के 2,08,000 स्कूलों के 1 करोड़ 72 लाख 50 हजार छात्रों के लिए 6.85 लाख शिक्षकों और अकादमिक संसाधनों का समान वितरण हो पा रहा है। इस कार्यक्रम को लागू करने वाले साझेदार के रूप में हमने अपनी टीम फील्ड मे ंउतारी है जो क्षमता संवर्धन का काम कर रही है, शिक्षकों के साथ मिल कर काम कर रही है और राज्य में इस तकनीक को आसानी से लाागू करने में सहायता कर रही है। 
मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुणशामी ने इस पहल के बारे में बात करते हुए कहा नीति आयोग, पिरामल स्कूल ऑफ लीडरशिप और बीसीजी के साथ मिलकर काम करते हुए हमने पिछले तीन वर्षों में शिक्षा परिवर्तन में एक लंबा सफर तय किया है। 21 वीं सदी के कौशल के निर्माण के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण को लेकर हम अपने बच्चों के भविष्य को सशक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते हैं। हमारे शिक्षक भी विभिन्न पहलों और प्रशिक्षणों के माध्यम से अधिक टेक-फ्रेंडली बन गए हैं, जो महामारी के दौरान हमारी विभिन्न ई-लर्निंग पहल के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश उन तीन चैम्पियन राज्यों में है, जहां 'साथ-ई' कार्यक्रम चल रहा है। अन्य दो राज्य झारखंड और ओडिशा हैं, जहां इसी तरह की गतिविधियां चल रही हैं। यह कार्यक्रम उच्च गुणवत्ता की स्केलेबल और सस्टेनेबल शिक्षा देने पर फोकस करता है। यह ऐसा मॉडल है जिसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।