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माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र : मुश्किल वक्त में कम आमदनी वाली महिला कर्जदारों के लिए एक बड़ा सहारा
October 4, 2020 • Admin • राष्ट्रीय

इंदौर । दो दशक से भी ज्यादा समय से माइक्रोफाइनेंस उद्योग कम आमदनी वाली और वंचित समूहों की महिलाओं की आर्थिक आजादी पाने में मदद कर रहा है। इससे महिलाएं सही वित्तीय निर्णय लेने के लिए सशक्‍त होती हैं। भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर एनबीएफसी-एमएफआई, बैंक, स्‍मॉल फाइनेंस बैंक या केवल एनबीएफसी सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा 30 जून 2020 तक 5.80 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रहा है। खासकर कोविड-19 के इस अभूतपूर्व समय में भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में निश्चित रूप से बदलाव हो रहा है। नवंबर 2016 की नोटबंदी हो या फिर 2020 में पूरी दुनिया पर छाई वैश्विक महामारी माइक्रोफाइनेंस उद्योग वित्तीय समावेशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।वर्तमान स्थिति में, जहां ऋण का वितरण आर्थिक गतिविधियों के कम हो जाने की वजह से अपेक्षाकृत कम हो गया है। लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि एक बार फिर से मांग में वृद्धि होगी, और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र वंचित महिला कर्जदारों की सेवा करना जारी रखेगा। इससे उन्‍हें आर्थिक के साथ ही भावनात्‍मक रूप से भी जोरदार वापसी करने में मदद मिलेगी। 

माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र से जो उधार मिलता है, वह जरूरतमंद महिलाओं को पैसा उपलब्ध कराने का औपचारिक जरिया है। यह न केवल कोलेटरल ढंग से नि:शुल्क है, बल्कि पूरी तरह से आरबीआई के निरीक्षण में है। इसमें जो ब्याज लगता है, वह भी बैलेंस कम होने के आधार पर लगता है। यह क्षेत्र अब नकद रहित बनने के लिए प्रयासरत है और इसके लिए यह तेजी से डिजिटल तकनीक अपना रहा है। अनौपचारिक ढंग से पैसा मुहैया कराना इसके ठीक विपरीत है, जिसमें उधार लेने वाली महिलाओं को महाजन से मिलने वाले कर्ज पर ब्याज चुकाते रहना पड़ता है और जीवन भर तक कर्ज की चक्की में पिसते रहना होता है।

माइक्रोफाइनेंस लोन अल्पकालिक लोन होते हैं। यह महाजनों (मनी लेंडर्स) से मिलने वाले लंबी अवधि वाले लोन के विपरीत होते हैं, जिनमें कोलेटरल के साथ ही 40 से 60 प्रतिशत के बीच ऊंचा ब्‍याज चुकाना पड़ता है। 

महिला उधारकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि एमएफआईएन, आरबीआई द्वारा मान्यता प्राप्त एक स्व-नियामक संगठन है, जिसके पास ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र (सीजीआरएम) है । इसके सदस्‍य संगठनों की महिला उधारकर्ता टोल-फ्री संख्या 1800 102 1080 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। एमएफआईएन सीजीआरएम 12 भाषाओं में उपलब्ध है, और किसी भी राज्य की महिला ग्राहक, देश में कहीं भी टोल-फ्री नंबर पर वीकडेज में सुबह 9:30 से शाम 5:30 के बीच कॉल कर सकती हैं। अनौपचारिक स्रोतों से लोन लेने पर महिला उधारकर्ताओं के लिए यह अनूठी सुविधा उपलब्ध नहीं है और वहां अनियमित और अनौपचारिक उधार का संचालन करने वालों की दया पर लोन की सुविधा मिल पाती है।