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मशीन लर्निंग ने मशीनों से भी मनुष्य की तरह कार्य करने की राह आसन की है: मल्होत्रा
November 22, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

भोपाल । प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी यंग थिंकर्स फोरम द्वारा, यंग थिंकर्स कानक्लेव का आयोजन किया जा रहा है। यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव 2020 का शुभारम्भ शनिवार को हुआ जिसमें देश-विदेश के कई युवाओं ने भाग लिया। यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव का यह तीसरा संस्करण है। देश के युवाओं के व्यक्तित्व का विकास करते हुए उनके मन में देशहित की भावना का संचार करने के उद्देश्य के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव के पिछले दो संस्करण भोपाल में भव्य रूप में संपन्न हुए थे जिनमें देश-विदेश के कई युवा विचारकों ने भाग लिया था। किन्तु वैश्विक महामारी कोरोना के चलते, सुरक्षा एवं सावधानियों को ध्यान में रखते हुए फोरम ने इस वर्ष का कॉन्क्लेव का आयोजन आनलाइन माध्यम जूम एप पर रखा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी न केवल देश बल्कि विदेशों से भी लोगों ने प्रविष्टियाँ दर्ज कराई हैं। यंग थिंकर्स कानक्लेव का आयोजन 21 से 25 नवंबर तक होगा जिसमें देश-विदेश के चर्चित वक्ताओं द्वारा विभिन्न विषयों पर उद्बोधन दिया जाएगा।

कार्यक्रम के पहले दिन यंग थिन्कर्स फोरम के संस्थापक एवं निदेशक आशुतोष सिंह ठाकुर ने शुभारम्भ सत्र में प्रतिभागियों को यंग थिन्कर्स फोरम के उद्देश्य एवं वार्षिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव के इस संस्करण के बारे में बताते हुए पिछले संस्करणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों के मन में उठ रही जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का भी समाधान किया। आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस एवं भारत का भविष्य कार्यक्रम के पहले अतिथि सत्र में अमेरिकी-भारतीय लेखक एवं इनफिनिटी फाउंडेशन के संस्थापक राजीव मल्होत्रा ने आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस एवं भारत का भविष्य विषय पर व्याख्यान दिया। वैश्विक उदाहरणों का उपयोग करते हुए उन्होंने भारत में आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस (ए.आई.) के भविष्य के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि ए.आई. का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, क़ानून व्यवस्था, पर्यटन, रचनात्मकता इत्यादि क्षेत्रों में किया जा सकता है। मशीन लर्निंग ने मशीनों से भी मनुष्य की तरह कार्य करने की राह आसन की है। उन्होंने कहा कि भारत में आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस के उपयोग में संतुलन बन्ने की बहुत आवश्यकता है। जहाँ इसके कम उपयोग से हम अन्य देशों के उत्पादों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे वहीं इसके अत्यधिक उपयोग से बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने भारत में शिक्षितों को प्रशिक्षण देने की आयु पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार विद्यार्थियों को स्नातक स्तर पर प्रशिक्षण देने के बजाय और भी पहले से प्रशिक्षण प्रदान करें तो देश को लाभ मिलेगा। सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने राजीव जी के समक्ष अपने प्रश्न रखे जिनका उन्होंने उत्तर दिया।

कॉन्क्लेव के पाँचों दिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न बुद्धिजीवी चिंतक, विचारक एवं लेखक विभिन्न समकालीन अथवा ज्वलंत विषयों पर युवाओं से संवाद करेंगे। अंतिम दिन सभी प्रतिभागियों को ‘भारतीय अध्ययन केंद्र’ द्वारा निर्मित एक ऑनलाइन कोर्स निशुल्क भेंट किया जाएगा।