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नहीं खुल रहीं शासकीय उचित मूल्य की दुकान, जनता हो रही है परेशान
May 6, 2020 • Admin
कोटरा में तीन दिन खुली दुकानें, कागजों हो रहा है वितरण
भोपाल। राजधानी में कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान प्रदेश सरकार के आदेश के बाद भी शासकीय उचित मूल्य की दुकाने नहीं खुल रही हैं जिससे शहर की जनता राशन से वंचित हो गई है। दुकान वाले खानापूर्ति कर राशन का गोलमाल कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के द्वारा जनता के लिए राशन वितरण की व्यवस्था की गई थी जो कि सभी वर्गो के लिए प्रति व्यक्ति पांच किलो राशन दिया जाना तय किया गया था। उसके लिए व्यक्ति को आधार नंबर इंद्राज करवाना आवश्यक कियागया था। लेकिन राजधानी में जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी की बैरूखी लापरवाही के चलते सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया गया। आज भी शहर में एैसे हजारों परिवार हैं जो कहने के लिए सक्षम हैं लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति लॉकडाउन के दौरान कमजोर हो गई। जिससे उन्हें भी राशन खरीदने में परेशानी हो रही है। वहीं प्रदेश सरकार के द्वारा सभी वर्गो को मुफ्त में राशन वितरण करने के आदेश जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारियों को किए जा चुके हैं। उसके बाद भी कुछ क्षेत्रों की दुकानों व नगर निगम के वार्डों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर क्षेत्रों में राशन का वितरण ही नहीं किया गया । उन्हीें क्षेत्रों में कोटरा सुल्तानाबाद का नाम है। जहां पर चार चार शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालित की जा रहीं हैं। जहां पर एक या दो दुकानों से ही राशन का वितरण किया गया है जो कि 2 से 5 दिन ही खोली गई। उसके बाद से बंद पड़ी हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि उक्त क्षेत्र में दुकानों पर राशन तो आता है लेकिन वितरण नहंीं किया जाता और गायब हो जाता है। कहां जा रहा है यह तो कहना मुश्किल है? लेकिन वहां की जरूरतमंद जनता आज भी राशन के लिए तरस रही है। यह हाल तो एक क्षेत्र का है। इसी के आधार पर शहर की आधी जरूरतमंद मध्यवर्गीय जनता 
खाने के लिए संघर्ष कर रही है। 
लापरवाह खाद्य आपूर्ति अधिकारी?
शहर में गरीब व मध्यमवर्गीय जनता को लॉकडाउन के दौरान राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने मुफ्त में राशन वितरण करने के आदेश दिए थे। लेकिन जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी की लापरवाही के चलते आज भी सैकड़ों परिवार राशन से वंचित है। इनके द्वारा केवल उन्हीं दुकानों का निरीक्षण किया जाता हैजहां पर नियमित राशन का वितरण किया जा रहा है। यह वहां तो निरीक्षण करना ही नहीं चाहती जहां की दुकानें महिने में दो से चार दिन ही खुलती है। एैसी शहर में दर्जनों दुकानें हैं जिन पर कृपा खाद्य आपर्ति विभाग की कृपादृष्टि बनी हुई है। जिससे वह मनमर्जी के मुताबिक दुकान खोलना व राशन वितरण करते हैं। इस मामले को लेकर जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी ज्योति शाह नरवरिया से संपर्क करना चाहा तो उनके द्वारा मोबाईल अटेंड नहीं किया गया।