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परिवहन कर्मचारियों को प्रधानमं त्री की मंशा अनुरुप निशुल्क राशन एवं राहत राशि दिलाने इंटक की मांग
August 8, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश


भोपाल। मध्य प्रदेश ट्राँसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन इंटक ने म.प्र.शासन के प्रमुख सचिव को पत्र भेज कर अनुरोध किया है कि  भारत सरकार ने अनलाक 2 की गाइड लाइन जारी करते हुये कहा था कि देश के 80 करोड़ गरीबो, मजदूरों को नवम्वर 2020 तक नि:शुल्क राशन दिया जावेगा और इससे पूर्व लघु उधौगों को पटरी पर लाने तथा बेरोजगार हुये लोगों को राहत राशि हेतु 20 लाख करोड़ रुपये का राहत राशि पैकेज घोषित किया गया है। इसकी घोषणा भी प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की थी।प्रेस को जारी बयान में फेडरेशन प्रवक्ता विजयकुमार शर्मा ने वताया कि महामंत्री प्रवेश मिश्रा द्वारा भेजे गये पत्र में मांग करते हुए बताया गया है कि मप्र में यात्री बसों का संचालन पूर्ण रुप से निजी हाथो में है, जिसमें लगभग 1.50 लाख चालक , परिचालक, हेल्पर, एजेन्ट, मेकेनिक काम करते है। 22 मार्च से निरन्तर बसें बन्द होने के कारण बेरोजगार हैं इनकी स्थति अति दय नीय है। वहीं हिल स्टेशनों एवं महानगरों सहित कस्वों के टैक्सी, आटो चालक भी कम ट्रेन और बसें न चलने से बेरोजगार हैं।इनमें से लगभग 40 प्रतिशत लोगों के पास नीले पीले राशन कार्ड नहीं हैं और कुछ के पास कोई भी राशन कार्ड नहीं हैं जिससे इन्हे राशन नहीं मिल पाया है। जिन निजी बस चालकों, परिचालकों, बुकिंग एजेन्टों, हेल्परों ,टैक्सी आटो चालकों के पास नीले पीले राशन कार्ड नहीं हैं उन्हे भी सामान्य स्थिति होने तक आधार एवं लाइसेंस के आधार पर नि:शुल्क राशन वितरण कराया जावे। प्रदेश के किसी भी प्रकार के परिवहन कर्मचारी को कोई राहत राशि नहीं मिली है।दूसरी ओर हाथ ठेलावाले, रेहणी वाले, फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले, फेरी वालों आदि को सरकार द्वारा राहत राशि दी जा रही है,जबकि इनका व्यवसाय पूर्ववत चालू हो चुका हैं। निजी बसों के चालक परिचालक हेल्पर, एजेन्ट, मेकेनिक को और टेक्सी, आटो चालक को 7500 रुपये प्रतिमाह या जो उचित समझें राहत राशि बस संचालन सामान्य रुप से प्रारंभ होने तक दिलाई जावे। मप्र. के 28 हजार निजी यात्री बस संचालकों में से लगभग 10 हजार ऐसे संचालक हैं जो पूर्व में  सपनि कर्मचारी और शिक्षित बेरोजगार थे जो बैंकों से ऋण पर एक या दो बस लेकर मालिक सहकर्मचारी हैं जो कोविड 19 के चलते भूखों मर रहे हैं। इनकी गिनती न मालिक में है न मजदूर में, बस सरकार ही सहारा है ।इन्हे अपना व्यवसाय पुन:खड़ा करने सरकार की गारण्टी पर या चेक के आधार पर बैंकों से दो वर्ष के लिये दो लाख रुपये का ऋण दिलाया जाए।  प्रशासनिक के साथ मानवीय आधार पर उचित कार्यवाही कर हम गरीबों का और हमारे परिवार का जीवन बचाने की कृपा करें।