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पेंशन अधिकार सम्मेलन 9 फरवरी को
February 8, 2020 • Vijay sharma

ष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु  नेतृत्व में सम्पन्न होगा 

भोपाल नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम nmops  इसकी मध्य प्रदेश के द्वारा पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करवाने के लिए पेंशन अधिकार सम्मेलन 9 फरवरी 2020 रविवार समय 11:00 से 5:00 बजे तक नीलम पार्क लिली टॉकीज के सामने जहांगीराबाद भोपाल में विजय कुमार बंधु राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्य अतिथि माननीय मनजीत पटेल राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्री विजेंद्र धारीवाल प्रांत अध्यक्ष हरियाणा विशिष्ट अतिथि एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता परमानंद डहेरिया प्रांताध्यक्ष  मध्य प्रदेश एवं समस्त प्रांतीय,  संभागीय , जिला कोर कमेटी के सदस्य विशिष्ट अतिथि व समस्त केंद्र व राज्य कर्मचारी अधिकारी पेंशन विहीन  साथियों की उपस्थिति में पुरानी पेंशन अधिकार सम्मेलन संपन्न होगा सम्मेलन के दौरान मध्य प्रदेश शासन के मंत्री की उपस्थिति होने पर पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के द्वारा सम्मान किया जाएगा मध्य प्रदेश शासन के  पी.सी शर्मा विधि विधाई एवं संसदीय कार्य, राजेंद्र कुमार सिंह पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष,  वीरेंद्र खोंगल सदस्य कर्मचारी अधिकारी कल्याण आयोग मध्यप्रदेश एवं अन्य विधायक मंत्री गण उपस्थित होंगे।  भारत सरकार ने सन 2004 में अध्यादेश लाकर संपूर्ण भारत में केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन स्कीम बंद कर शेयर बाजार आधारित न्यू पेंशन स्कीम  लागू कर दिया था जिसके परिणाम आज भारत के शासकीय केंद्रीय कर्मचारी अधिकारियों को 100-1200  रूपये प्राप्त हो रहे है भुगत रहे हैं ,आज भारत की समस्या बन गई है माननीय अटल बिहारी वाजपेई पूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार ने कानून बनाकर लागू किया है जिसके कारण भारत के 60 लाख कर्मचारी अधिकारी प्रभावित हुये  हैं इनका बुढ़ापे का सहारा छिन गया है मध्य प्रदेश शासन ने पुरानी पेंशन 2005 मे  बंद कर दी है जिसके कारण के 6:5लाख कर्मचारी अधिकारी प्रभावित हुये  हैं मध्यप्रदेश मे सन 2017 से   Nmops/MP लगातार आंदोलन हो रहा है मध्य प्रदेश शासन के मुखिया कमलनाथ ने अपने (घोषणापत्र) वचन पत्र में पुरानी पेंशन बहाली की बात शामिल किए हैं तथा विधानसभा सत्र के दौरान भी पुरानी पेंशन बहाल(ops) करने की बात कही है तथा कर्मचारी अधिकारियों की समस्या के लिए एक वेतन आयोग का गठन किया है जिसके माध्यम से मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की समस्या हल की जाएगी मध्य प्रदेश शासन 2005 के पूर्व शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य भागों में 1982, 1987, 1995, कर्मचारियों की भर्ती की और उन्हें शासकीय नियमित कर्मचारी भी माना है पर पुरानी पेंशन स्कीमops से वंचित रखा है शासकीय विभागों में 20 -25वर्ष की सेवा देने वाले  ops से वंचित है। और इन कर्मचारियों  को मध्यप्रदेश शासन ने अनिवार्य  सेवा निवृत्ति  अधिनियम लागू करती है कर्मचारी को पेंशन नहीं है  जबकि हमारे पड़ोसी राज्यों में छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों में भी पुरानी  पेंशन स्कीम कर्मचारी को लागू है मध्यप्रदेश शासन ने Nps स्कीम  को पूर्ण तरह लागू   लागू नहीं किया है जबकि केंद्र में स्कीम लागू है NPS कर्मचारी मतृक शासकीय सेवक के आश्रित परिवार को परिवार पेंशन  है ।
        युवा शिक्षकों कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पुरानी पेंशन है बड़े-बड़े शिक्षक कर्मचारी संगठनों एवं नेताओं के रहते हुए भी विगत 14 वर्षों में पेंशन बहाली की बात छोड़िए पेंशन मुद्दा  गायब  हो गया था किसी भी संगठन ने पुरानी पेंशन की समाप्ति पर कोई निर्णायक एवं व्यापक आंदोलन तक नहीं किया कुछ बड़े नेताओं ने तो स्वयं पुरानी पेंशन लेते हुए नौजवानों को एनपीएस की खूबियां बताने लगे जबकि इन्हें खूब पता था कि एनपीएस कर्मचारियों के लिए कितनी घातक सिद्ध होगी विधानसभा में कई वर्षों से विराजमान सदन में इस मुद्दे पर चर्चा एवं बहिर्गमन तक नहीं कर पाए ऐसे हालात में पेंशन विहीन नौजवानों में काफी निराशा एवं आक्रोश व्याप्त हो गया ऐसे प्रकरणों से हताश कुछ पेंशन विहीनो ने अपने हक की लड़ाई के लिए एक संगठन का निर्माण राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार बंधु जी के निर्देशन में मध्यप्रदेश में श्री परमानंद डेहरिया एवं  एम आर फारुख खान के नेतृत्व में किया जो आज के समय में पुरानी पेंशन बहाली का पर्याय बन चुका है एनएमओपीएस केवल एक विभाग के  कर्मचारियों का संगठन  नहीं बल्कि पुरानी पेंशन से वंचित समस्त शिक्षकों, कर्मचारी, अधिकारियों का संगठन है एनएमओपीएस ने अपने सतत संघर्ष से पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैला देने का कार्य किया एनएमओपीएस के नाम से पूरे प्रदेश के पेंशन विहीन एकजुट होकर हक की लड़ाई लड़ रहे हैं
       पेंशन क्या है 
    पेंशन एक पूर्व निर्धारित राशि है जो कोई नियोक्ता अपने कर्मचारी को उसके सेवाकाल की समाप्ति के बाद भी देने के लिए बाध्य है पेंशन देने की व्यवस्था बहुत ही प्राचीन है भारत के राजाओं के शासनकाल में भी यह व्यवस्था लागू थी राजा अपने कर्मचारियों को 40 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर जीवन यापन के लिए वेतन की आधी धनराशि के बराबर पेंशन देता था अंग्रेजों के शासनकाल में जारी रही और 1935 में  इसको कानूनी जामा पहनाया गया पेंशन एक लंबित वेतन भी है क्योंकि कर्मचारियों को जो भी वेतन दिया जाता है उसका कुछ भाग सरकार अपने पास रखती है उसी से रिटायरमेंट के बाद उसको पेंशन दिया जाता है इस प्रकार आज सरकार पेंशन भी नहीं दे रही है और लंबित वेतन भी नहीं दे रही है कर्मचारियों के पक्ष में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी निर्णय दिया है उच्चतम न्यायालय में एक बहुचर्चित याचिका डीएस नकारा एवं अन्य बनाम भारत सरकार में मुख्य न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ ने दिनांक 17 12 1982 ए आई आर 1983 ac-130 फैसला दिया है की पेंशनर को इस तरह समर्थ होना चाहिए कि वे अपने ऊपर ही आश्रित रहे उसका स्वयं का सम्मान जीवनयापन का स्तर भी रिटायरमेंट के पूर्व वाला ही रहे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि पेंशन कर्मचारी द्वारा पूर्व में की गई सेवाओं का लंबित वेतन है यह सेवा योजक द्वारा की गई कोई कृपा या भीख भी नहीं है यह कर्मचारी का अधिकार है पेंशन को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है पेंशन बुढ़ापे की लाठी है शिक्षक कर्मचारी का मान-सम्मान एवं अभिमान है पुरानी पेंशन पूंजीपतियों एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों की साजिश के तहत भारत सरकार ने यह पुरानी पेंशन की व्यवस्था 1 जनवरी 2004 में बंद कर दिया और मध्य प्रदेश सरकार ने भी एक अप्रैल 2005 से इस योजना को समाप्त कर दिया जिससे युवा कर्मचारियों की बुढ़ापे की लाठी उनसे छीन ली गई और सरकारों ने कर्मचारियों को अपाहिज बना दिया
PFRDA बिल नवीन पेंशन सिस्टम क्या है एनपीएस अमीरों के जबड़े में एनपीएस मतलब नेशनल पेंशन सिस्टम मध्यप्रदेश में दिनांक 14 2005 से समस्त विभागों के कर्मचारियों के लिए पेंशन नियमावली 1961 व जीपीएफ नियमावली 1995 शून्य घोषित कर दी गई अर्थात 14 2005 से भर्ती कर्मचारियों पर एनपीएस लागू हो गया कमजोर आर्थिक स्थिति एवं राजकोषीय घाटे का हवाला देते हुए भारत सरकार ने 23 अगस्त 2003 को अंतरिम पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण का गठन किया और लोकसभा में पहले 2003 में फिर 2005 में पीएफआरडीए बिल प्रस्तुत किया परंतु यह बिल पास ना हो सका भारत सरकार ने 10 अक्टूबर 2003 को ही एक कार्यकारी आदेश के तहत पीएफआरडीए Bil ke tahat NSDL national security depository Limited ko Central Record Keeping Agency Banaya Gaya बैंक ऑफ इंडिया को ट्रस्टी बैंक नियुक्त किया गया और एसबीआई यूटीआई तथा एलआईसी को पेंशन निधि प्रबंधक नियुक्त किया गया एनपीएस व्यवस्था पूरी तरह कंपनियों बहुराष्ट्रीय पूंजी पतियों की कुटिल चाल है जो कर्मचारियों के अंशदान से अपने पेट भरेंगे और कर्मचारियों के धन को शेयर मार्केट में लगाकर हड़प भी जाएंगे एनपीएस के तहत प्रत्येक कर्मचारी का एक प्राण नंबर होता है जो tier-1 कहलाता है इसमें कर्मचारी का वेतन प्लस ग्रेड वेतन प्लस महंगाई भत्ते का 10% कटौती होती है और इतनी धनराशि सेवायोजन भी जमा करता है पूरे सेवाकाल में जो भी धनराशि शेयर मार्केट में लगकर बनेगी उसका 60% कर्मचारी को नगद भुगतान किया जाएगा शेष 40% धनराशि किसी बीमा कंपनी से पेंशन प्लान लेना होगा और वही कंपनी पेंशन देगी पूरी व्यवस्था कितनी त्रुटिपूर्ण हैं आप स्वत  समझ सकते