ALL शिक्षा मध्यप्रदेश मनोरंजन राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य खेल राजनीति
राजस्व वसूली अभियान में लापरवाही तीन की विभागीय जांच, एक दर्जन को नोटिस
March 8, 2020 • Admin
भोपाल । मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा राजस्व वसूली के लिए निधाज़्रित लक्ष्य और उपभोक्ता सेवाओं में रूचि नहीं दिखाने एवं कायज़् में लापरवाही और कोताही को देखते हुए एक दर्जन से अधिक अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। कंपनी के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने भोपाल शहर एवं भोपाल ग्रामीण की समीक्षा के दौरान कुछ अधिकारियों को कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में सख्त कार्यवाही के संकेत दिए हैं। कंपनी ने बैरागढ़, मिसरोद, शाहगंज, लाड़कुई, गुनगा, बुधनी,
बैरसिया, ईंटखेड़ी, दानिशकुंज, खजूरी सड़क, सूखी सेवनियां एवं परवलिया सड़क के कनिष्ठ अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने सचेत
किया है कि कार्य में पारदर्शिता, लगन, निष्ठा और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही बदाज़्श्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनी में जीरो टोलरेंस की नीति लागू कर दी गई है और सभी मैदानी अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि वे उपभोक्ता सेवाओं और कंपनी की उत्तरोत्तर तरक्की के लिए निरन्तर प्रयास करते रहें। कंपनी ने संचारण संधारण भोपाल के तत्कालीन उपमहाप्रबंधक एमएल निकरवार
और वर्तमान उपमहाप्रबंधक प्रदीप सिंह चौहान को राजस्व वसूली में रूचि नहीं लेने और राजस्व वसूली की गिरावट को देखते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इसी बीच वर्तमान में डबरा में कार्यरत उपमहाप्रबंधक जीएस लाम्बा को प्रति यूनिट नकद राजस्व वसूली (सीआरपीयू) में कमी तथा कार्य में लापरवाही के आरोप में आरोप पत्र जारी करने की कार्यवाही कर दी गई है। इसी प्रकार तत्कालीन उपमहाप्रबंधक ग्वालियर गगनदेव, गोहद हरीश मेहता एवं रायसेन केके सिंह के विरूद्ध विभागीय जांच
संस्थापित कर दी गई है। इन अधिकारियों के ऊपर कार्य में लापरवाही और राजस्व वसूली में लक्ष्य के विरूद्ध काम नहीं करने का आरोप है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने सचेत किया है कि सभी अधिकारी/कमज़्चारी मेहनत से कायज़् करते हुए उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देना सुनिश्चित करें और राजस्व वसूली के प्रति संवेदनशील रहें ताकि कंपनी को राजस्व नुकसान न हो और कंपनी के सकल तकनीकी और वाणिजर््ियक नुकसान में कमी लाई जा सके।