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रासेयो स्वयंसेवकों का आवाज और यूनिसेफ द्वारा बाल संरक्षण पर प्रशिक्षण संपन्न
February 25, 2020 • Vijay sharma

बाल संरक्षण जैसी बड़ी चुनौती के लिए युवाओं को आगे आना होगा: डॉ. अनंत सक्सेना

युवा समाज में जागरूकता लाकर बच्चों के पक्ष में बना सकते हैं माहौल: कृपा शंकर चौबे

बच्चों के पक्ष में समाज का नजरिया बदला जाना जरुरी : प्रशांत दुबे

भोपाल। बाल संरक्षण आज की बड़ी चुनौती है, इससे जूझने के लिए जरूरी है कि हम सजग हों और अपने आसपास को समझें| शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान होने से नहीं आती बल्कि अपने समाज को गहरे से समझना और फिर वापस समाज को देना भी इसका अनिवार्य अंग है| बच्चों से जुड़े क़ानून को समझना आज बहुत जरुरी है, साथ ही सोशल मीडिया को समझते हुए उस पर पहल करना जरूरी है| बाल संरक्षण जैसी बड़ी चुनौती के लिये युवाओं को आगे आना होगा| उक्त बात आज बरकतुल्ला विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना(रासेयो) के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनंत सक्सेना ने होटल कस्तूरी में आवाज और यूनिसेफ द्वारा भोपाल जिले के रासेयो स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण के समापन अवसर पर व्यक्त किये| इस मौके पर रासेयो मुक्त ईकाई बरकतुल्ला विवि कार्यक्रम अधिकारी राहुल सिंह परिहार व हमीदिया महाविद्यालय के रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डा. आरपी शाक्य भी विशेष रूप से उपस्थित रहे| 

इस कार्यशाला में भोपाल की संस्था आवाज के निदेशक और प्रशिक्षक प्रशांत दुबे ने बताया कि मध्यप्रदेश बच्चों से जुड़े मामलों में ज्यादा संवेदनशील है| उन्होंने कहा कि बच्चों पर होने वाले अपराध में मध्यप्रदेश दूसरे पायदान पर है जबकि बच्चों द्वारा किये जाने वाले अपराधों में मध्यप्रदेश पहले पायदान पर है| मध्यप्रदेश से रोजाना 30 बच्चे गायब होते हैं, जिनमें से 16 लडकियां हैं और 9 बच्चे फिर कभी वापस नहीं मिलते हैं| उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से ट्रेफिकर्स गिरोह सक्रिय होकर बच्चों को गायब कर देते हैं| बच्चों के लैंगिक शोषण के मामले भी बहुत ज्यादा हैं। देश में हर दूसरा बच्चा लैंगिक शोषण का शिकार है। भारत में 53 फीसदी बच्चों के साथ लैंगिक शोषण की घटनाएं घटित होती हैं| इनमें से भी लड़कों के साथ लैंगिक शोषण ज्यादा है| इस स्थिति से निबटने के लिए भारत देश में अब पाक्सो कानून है| मध्यप्रदेश बाल विवाह को लेकर उन 5 राज्यों में शामिल है जहां कि बाल विवाह बहुत हैं। श्री दुबे ने इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को जेजे एक्ट, पाक्सो एक्ट आदि की विस्तार से जानकारी दी| मुक्त ईकाई कार्यक्रम अधिकारी राहुल सिंह परिहार ने बताया कि बाल अधिकारों पर  काम करने वाली संस्था आवाज(aawaj), यूनिसेफ और रासेयो द्वारा संयुक्त रूप से बाल संरक्षण के लिए एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका नाम “यूथ एज चैंपियन फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन” है। यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश के दो विश्वविद्यालय परिक्षेत्र परिक्षेत्र (बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर) के अंतर्गत आने वाले समस्त समस्त 16 जिलों में  संचालित किया जा रहा है| 

इस कार्यक्रम में युवा स्वयंसेवकों को जागरूक करते हुए उनके माध्यम से जनसामान्य को जागरूक करने की यह अनूठी परियोजना है।  रासेयो के अंतर्गत विभिन्न संरचनाओं का अलग-अलग समय पर प्रशिक्षण कर उन्हें बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों के सन्दर्भ में तैयार किया जाएगा।  एनएसएस वालंटियर द्वारा वर्ष भर होने वाली गतिविधियों में बाल संरक्षण को समाहित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 75000 युवा स्वयंसेवक जुड़ेंगे। आवाज की ओर से ही समन्वयक अस्मा खान व गौरव म्हसे द्वारा नेतृत्व विकास और बाल विवाह/बाल श्रम आदि से जुडी जानकारियाँ दी गईं| उन्होंने पेन्सिल पोर्टल की जानकारी भी साझा की, साथ ही गुमशुदा बच्चों के सम्बन्ध में जानकारी भी दी| इस प्रशिक्षण में बाल कल्याण समिति (बाकस) की भूमिका पर एक सत्र आयोजित किया गया| बाकस सदस्य, भोपाल कृपा शंकर चौबे ने यह जानकारी दी| उन्होंने बताया कि किस तरह से देखभाल और सुरक्षा की जरुरत वाले बच्चों के लिये यह समिति काम करती है| उन्होंने विशेष किशोर पुलिस ईकाई की भूमिका को लेकर भी एक सत्र का सहजीकरण किया| उन्होंने बताया कि किस तरह से बच्चों को लेकर यह ईकाई काम करती है| आवाज की वरिष्ठ साथी सुश्री रोली शिवहरे ने सभी का आभार मानते हुए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को आज की महती आवश्यकता बताया और कहा कि यदि रासेयो से जुड़ा स्वयंसेवक बच्चों के पक्ष में आगे आता है तो इससे बेहतर अवसर और कोई नहीं हो सकता है| इस प्रशिक्षण कार्यशाला में भोपाल जिले के 40 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण किया गया|