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साहित्य हमें जोड़कर रखने का काम करता है: डॉ. उमेश
May 6, 2020 • Admin
काव्य-मंजूषा में देशभर के साहित्यकारों ने सुनाई रचनाएं
भोपाल। काव्य-मंजूषा,भोपाल द्वारा लॉक डाउन के समय साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए ऑनलाइन कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया,जिसमें देश भर के प्रतिष्ठित रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। गोष्ठी में अध्यक्षता मप्र साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ उमेश कुमार सिंह, मुख्य अतिथि चेन्नई से डॉ.जमुना कृष्णराज एवं संयोजन डॉ सुधीर कुमार शर्मा तथा संचालन शुभम चौहान तामोट ने किया।डॉ सुधीर कुमार शर्मा ने मां शारदे की वंदना प्रस्तुत हुए रात रोशनी को जितनी छले, आंखों में सुबह का ही सपना पले,सूर्य की उदासियों के अंत के लिए,शब्द-शब्द जन्म ले बसंत के लिए रचना पढ़ी।डॉ रमा सिंह ने कोरोना महारानी के बीच सभी से आवाह्न करते हुए हिंद के नेतृत्व में नव चेतना का युग विमल हो रचना पढ़ी। आगरा के प्रोफेसर केशव शर्मा ने चलों बनाएं ऐसा घर, जहां किसी से हो न डर कविता पढ़ी।नेहरू युवा केंद्र में समन्वयक डॉ सुरेंद्र शुक्ला ने श्रृंगार गीत अब तो पलकों को अपनी उठा लीजिए, प्यार की शम्मा फिर से जला लीजिए... पढ़ा। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ उमेश कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना काल में जहां हम प्रत्यक्ष रुप से नहीं मिल सकते ऐसे समय में देश को ओज प्रदान करने के लिए हम इस माध्यम से सामूहिक रूप से निकट है,सुख-दुख बांटने के लिए इस तरह की गतिविधियां आज के समय में आवश्यक है। मुख्य अतिथि डॉ.जमुना कृष्ण राज ने कहा कि हर कोई व्यक्ति कवि नहीं है,कवि होने के लिए ईश्वरीय दृष्टि आवश्यक है। हर व्यक्ति के मन में अनेक भावनाएं उत्पन्न होती है पर कुछ व्यक्ति परिस्थितियों और अपने इर्द-गिर्द की घटनाओं से प्रभावित होकर भाव विभोर हो जाता है यही भावनाएं काव्य का सृजन करती है। इन्होंने किया रचनापाठ- डॉ सुधीर कुमार शर्मा भोपाल, डॉ सुरेंद्र शुक्ला भोपाल, डॉ रमा सिंह गुना, नरेन्द्र व्यास नीमच, सुरेंद्र गोस्वामी मनासा, डॉ केशव शर्मा आगरा, सुरेश शर्मा मनासा, रमेश शर्मा चित्तौड़, डॉ अशोक गोयल गुना।