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सामान्य-प्रशासन विभाग की भूल दिव्यांग अधिकारियों पर भारी
August 9, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

भोपाल। भारत सरकार द्वारा लॉक डाउन के दौरान दिव्यांग कर्मचारियों को सेवाओं से दूर रखे जाने के आदेश को लेकर मप्र शासन की गले कि फांस बन गई है । मप्र शासन ने दिव्यांग की जगह सिर्फ कर्मचारी का उपयोग करने उन्हें छूट से वंचित किया गया। 
भारत सरकार कार्मिक मंत्रालय के पत्र  27 मार्च2020 द्वारा कोविड-19 से सुरक्षा हेतु सभी विभागों में कार्यरत दिव्यांग जनों को कार्यमुक्त रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसी पत्र का संदर्भ देते हुए मध्यप्रदेश शासन सामान्य-प्रशासन विभाग मंत्रालय द्वारा  11 मई, 2020 को जारी निर्देशों में शासकीय कार्य पर उपस्थित होने से दिव्यांग कर्मचारियों को छूट दी गई है। ज्ञात हो कि भारत सरकार का पत्र दिव्यांगता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सभी अधिकारी कर्मचारियों को उपस्थिति से छूट प्रदान कर रहा है। भारत सरकार के पत्र में स्पष्ट रूप से परसंस विद डिसेबिलिटीज लिखा है जबकि मध्यप्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग ने दिव्यांगजन के स्थान पर कर्मचारी शब्द का गलत प्रयोग करके उक्त छूट से अधिकारियों को वंचित कर दिया है। प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारी शब्द प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के लिए एवं कर्मचारी शब्द तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए प्रयोग किया जाता है। इस वजह से अधिकारियों को शासन द्वारा दी जा रही छूट का लाभ नहीं मिल रहा है। कोराना संकट में जब आटोरिक्शा, टैक्सी, सिटी बस आदि की सुविधाएं बंद हैं तब दिव्यांग अधिकारियों के सामने कार्यालय तक पहुँचने का भी गंभीर संकट हैं। दिव्यांगता के आधार पर सभी अधिकारी कर्मचारी समान हंै। और कोरोना का संकट भी सबके सामने एक सा ही है। इसलिए सामान्य प्रशासन विभाग की यह पक्षपातपूर्ण नीति सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांत के विरुद्ध है। अंग्रेजी से हिंदी में शब्द अनुवाद की यह छोटी सी भूल पूरे प्रदेश के दिव्यांग अधिकारियों पर भारी है क्योंकि मध्यप्रदेश शासन के अन्य सभी विभाग इसी पत्र के आधार पर केवल कर्मचारियों को छूट प्रदान कर रहे हैं। अधिकारियों को नहीं। इस संबंध में तत्काल स्पष्ट निर्देश प्रसारित किया जाना जरुरी है।