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SC/ST आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने जताई असमति, कहा- इससे दलितों को पहुंची भारी क्षति
February 17, 2020 • Vijay sharma

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारें बाध्य नहीं हैं, क्योंकि यह मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एससी/एसटी के लोग सरकारी नौकरियों में आरक्षण का दावा नहीं कर सकते, यह राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर करता है। कोर्ट के इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने असहमति जताई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने सोमवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस से बात की। मुकुल वासनिक ने कहा कि हाल में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया है। इस फैसले ने एससी/एसटी को मिलने वाले आरक्षण को भारी क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो बातें प्रमुखता से सामने आई हैं:
1. एससी/एसटी के व्यक्तियों की सरकारी पदों पर भर्ती कोई मौलिक अधिकार नहीं है।
2. सरकारी पदों पर एससी/एसटी के लोगों को नियुक्ति देने में कोई आरक्षण की व्यवस्था करना सरकारों का कोई संवैधानिक कर्त्तव्य नहीं है।”

वासनिक ने आगे कहा, “हम इस फैसले से सहमत नहीं हैं। संविधान के जरिए जो अधिकार एससी/एसटी के लोगों को प्राप्त हुए, उन पर आम सहमति रही है। लेकिन, दुर्भाग्यवश आज की सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों के बयान वंचित और प्रताड़ित व्यक्तियों के अधिकारों पर संकट खड़ा करते रहे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कुछ समय पहले आरक्षण पर पुनर्विचार करने की बात कही थी। संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य जी ने आरक्षण को खत्म करने की बात कही थी और इससे अलगाववाद फैलने की बात भी कही थी।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “खुद प्रधानमंत्री ने अपनी किताब में वाल्मीकि समुदाय को लेकर जो टिप्पणी की थी, उससे पूरा देश परिचित है। हमारा स्पष्ट मानना है कि एससी/एसटी के लोगों की सरकारी पदों पर नियुक्ति सरकारों के विवेक पर नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार रहा है।”

मुकुल वासनिक ने कहा, “कांग्रेस संसद और संसद के बाहर इसका विरोध करेगी। कांग्रेस सरकार ने पूर्व में भी एसी और ट्राइबल्स के लिए योजना लेकर आई थी, जिसके जरिए लोक संख्या के आधार पर एससी/एसटी के विकास के लिए बजट में प्रावधान करने की बात थी, जिसे बीजेपी सरकार ने निरस्त किया है।”

कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “उत्तराखंड सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण को बाध्य नहीं माना है। जबकि केंद्र सरकार दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में है। बीजेपी इस विरोधाभास को स्पष्ट करे। क्या केंद्र और उत्तराखंड की बीजेपी अलग-अलग है? केंद्र सरकार स्पष्ट करे कि क्या वो उत्तराखंड सरकार के फैसले से सहमत है? अगर सहमत नहीं है, तो उत्तराखंड सरकार के खिलाफ एक्शन लेगी।”

मुकुल वासनिक ने कहा कि संविधान के जरिए जो अधिकार एससी/एसटी के लोगों को प्राप्त हुए, उन पर आम सहमति रही है। लेकिन, दुर्भाग्यवश आज की सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों के बयान वंचित और प्रताड़ित व्यक्तियों के अधिकारों पर संकट खड़ा करते रहे हैं।