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शबरी जयंती समारोह एवं आदिवासी सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री
February 26, 2020 • Vijay sharma
आदिवासी क्षेत्रों में पलायन रोकने और रोजगार देने बनेगी सुनियोजित योजना मुख्यमंत्री का 
भोपाल । मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास का नया इतिहास बनाया जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों से पलायन को रोकने, रोजगार देने और स्थानीय उपज का उचित दाम दिलाने के लिए सुनियोजित योजनाएं बनेंगी। श्री कमल नाथ आदिवासी बाहुल्य डिण्डौरी जिले में माता शबरी जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह एवं आदिवासी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि आदिवासी इलाकों के विकास के लिए जो योजनाएं बनी थीं और वर्षों से धूल खा रहीं हैं, ऐसी योजनाओं को लागू कर आदिवासी भाईयों तक उनका लाभ पहुँचाया जाएगा। श्री कमल नाथ ने यह बात बरगी बाँध निर्माण के समय डिण्डौरी जिले को भी नर्मदा नदी का लाभ देने की योजना के संदर्भ में कही। यह योजना दस हजार करोड़ लागत की है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की शान आदिवासी समाज का सर्वांगीण विकास हो। उन्हें काम की तलाश में बाहर ना जाने पड़े। घर में, गाँव में ही, उनके पास रोजगार हो, सरकार इसके लिए प्रयासरत है।
मानवता और सरलता की प्रतिमूर्ति है माता शबरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता शबरी मानवता और सरलता की प्रतिमूर्ति हैं। यही कारण है कि उनके प्रति आदिवासी समाज में अगाध श्रृद्धा और आस्था है। उन्होंने कहा कि यह सबसे पवित्र दिन है, जब आदिवासी युवा संकल्प लें कि वे आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को अपनाएंगे और अपने गौरवशाली इतिहास को सदैव अक्षुण्ण बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जाति होने के बाद भी आदिवासी समाज में जो एकजुटता है, वह उनकी संस्कृति और संस्कार की ही शक्ति है, जिसे बुजुर्गों ने अपनाया और सुरक्षित रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज विकास प्रक्रिया में सहभागी बना है। आवश्यकता इस बात कि है कि अपने अधिकार और हक के लिए आदिवासी वर्ग एवं उनके प्रतिनिधि अपनी आवाज को बुलंद करें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।
रोजगार और कृषि क्षेत्र में नई नीतियाँ लागू
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में युवाओं को, जिन पर मध्यप्रदेश और देश के निर्माण की जिम्मेदारी है, उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए निवेश का एक नया माहौल बनाया गया है। कृषि क्षेत्र में किसान कर्ज मुक्त होकर अपनी उपज का सही दाम प्राप्त करें, इसके लिए नई नीतियाँ लागू की जा रही हैं। जय किसान फसल ऋण माफी योजना में 22 लाख किसानों का ्रऋण माफ किया गया है।
बदहाल प्रदेश के हालात बदलने बताई नियत और नीति
श्री कमल नाथ ने कहा कि पिछले साढ़े ग्यारह माह में नई सरकार ने विरासत में मिले खाली खजाने और बदहाल व्यवस्था को सुधारने में अपनी साफ नियत और नीति बताई है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में उत्पन्न चुनौतियों का सामना करते हुए नई सोच और दृष्टिकोण के साथ काम किया जा रहा है। देश में किसान आत्महत्या में नंबर-वन मध्यप्रदेश के किसानों को राहत पहुँचाई गई है। बेरोजगारी में नंबर-वन प्रदेश के युवाओं को बेरोजगारी के अंधकार से निकालने के नए निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। श्री कमल नाथ ने कहा कि हर चुनौती का हम पूरी ताकत से मुकाबला कर रहे हैं। इस संकल्प के साथ कि आने वाले दिनों में प्रदेश के विकास का एक नया नक्शा बनाएंगे।
घोषणाओं पर नहीं, काम होने पर विश्वास करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं घोषणाएं करने पर विश्वास नहीं करता। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 21 हजार घोषणाएं की थीं। उनका परिणाम क्या हुआ, इसे पूरा प्रदेश जानता है। उन्होंने कहा कि आम जनता भी घोषणाओं होने पर ताली न बजाए। जब उनके सामने काम पूरा हो जाए, उन्हें महसूस हो कि उनका विकास हो रहा है, रोजगार मिल रहा है, तब वे ताली बजाएं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार कहने नहीं काम करने पर विश्वास करती है।
सच्चाई का साथ देते रहें, निराश नहीं होंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडला और डिंडौरी के आदिवासी भाईयों ने सदैव सच्चाई का साथ दिया है। उन्होंने जो विश्वास और शक्ति दी है, उसके बल पर हम कभी भी इस क्षेत्र के लोगों को निराश नहीं होने देंगे। श्री कमल नाथ ने कहा कि डिण्डोरी और मंडला का एक नया इतिहास विकास के नक्शे पर अंकित हो, इसके लिए सरकार वचनवद्ध है।
डिण्डोरी जिले के प्रभारी वित्त मंत्री श्री तरुण भनोत ने कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में प्रदेश में वित्तीय संकट के बावजूद भी देश की सबसे बड़ी किसानों की फसल ऋण माफी योजना को लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आर्थिक हालत चुनौतिपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपये का ऋण था। जब नई सरकार ने कार्यभार संभाला, तब प्रदेश पर 1 लाख 80 हजार करोड़ का ऋण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर आदिवासी क्षेत्रों में, विशेषकर मंडला और डिण्डोरी में कोदो और कुटकी फसल को सरकारी स्तर पर खरीदने के लिए योजना बनाई जा रही है। इसी तरह, डिण्डोरी जिले के लोगों को नर्मदा जल उपलब्ध कराने के लिए 40 साल पहले बनी योजना को शुरु करने की पहल की गई है, जिसकी लागत 10 हजार करोड़ रुपये है। आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री  कमल नाथ हमेशा से आदिवासियों के हितों के लिए चिंतित रहते हैं। अपने मुख्यमंत्री के अल्प कार्यकाल में ही आदिवासियों के लिए मुख्यमंत्री मदद योजना, मृत्यु और जन्म होने पर सामाजिक कार्यों के लिए नि:शुक्ल खाद्यान एवं विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में वृद्धि करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री लखन घनघोरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक साल में शासन प्रशासन को लोगों के घर तक पहुँचाने के लिए 'आपकी सरकार-आपके द्वार' योजना शुरु की। कन्यादान और निकाह योजना में न केवल अनुदान राशि 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार की बल्कि यह राशि गरीब कन्याओं को मिलना सुनिश्चित हो, इसके लिए सीधे उनके खाते में राशि पहुंचाने की व्यवस्था की। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिले। नकली दवाईयाँ मिलना बंद हों और प्रदेश की जनता माफिया से मुक्त हो। इसके लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने खाए शबरी के बेर
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ को समारोह में प्रगतिशील कौल महासभा के अध्यक्ष, श्री माखन लाल सरैया ने शबरी के बेर खिलाए। प्रारंभ में मुख्यमंत्री का आदिवासी परंपरा के साथ स्वागत किया गया। आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री को जैकेट पहनाकर परंपरागत तरीके से अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने आजीविका मिशन के तहत आदिवासी महिला स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित कोदो-कुटकी उत्पाद का लोकार्पण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना एवं अन्य हितग्राही योजनाओं के हितलाभ वितरित किए। जय किसान फसल ऋण माफी योजना के द्वितीय चरण में शामिल किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण-पत्र वितरित किए। डिंडोरी में फसल ऋण माफी योजना के प्रथम तथा द्वितीय चरण में किसानों के 38 करोड़ 19 लाख रुपए के फसल ऋण माफ किये गये हैं। मुख्यमंत्री ने समारोह में लगभग 35 करोड़ रूपये लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया। इस मौके पर विधायक, प्रगतिशील कौल महासभा डिंडौरी के अध्यक्ष Ÿमाखनलाल सरैया] विश्वनाथ कौल, कौशल्या गौटिया एवं बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।