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शिक्षक सदैव हमें निखारने का कार्य करते हैं : डॉ शुक्ला
September 7, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

शिक्षक दिवस पर युवा संवाद का आयोजन
भोपाल। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में नेहरू युवा केंद्र भोपाल द्वारा युवा संवाद का आयोजन आनलाइन माध्यम से किया गया।
शिक्षक दिवस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए जिला युवा समन्वयक डॉ. सुरेंद्र शुक्ला ने कहा कि शिक्षा जगत में उनका योगदान अविस्मरणीय है। जीवन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर अनेक लोगों से जो भी अच्छा सीखने को मिलता है उसे सदैव ग्रहण करना चाहिए। जो सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें वही सच्चा शिक्षक है। राधाकृष्णन जी का पूरा जीवन शिक्षाप्रद रहा है।
शोधार्थी शुभम चौहान ने कहा कि शिक्षक सदैव हमारी अंदर छुपी हुई प्रतिभा को तराशने का कार्य करते हैं, हममें जो अच्छाईयां है वह सब गुरु अथवा शिक्षकों की देन है परंतु जो कमियां हैं उसके हम स्वयं जिम्मेदार हैं।भले आज समय के साथ बहुत से तौर - तरीके बदल रहे हैं फिर भी गुरु का स्थान गूगल नहीं ले सकता है। गूगल पर हमें तमाम सूचनाएं और जानकारियां प्राप्त हो सकती है जो संशय भी पैदा कर सकती है, परंतु शिक्षक या गुरु सदैव संशय निवारण करने का कार्य करते हैं। जो व्यक्ति अपने जीवन में माता, पिता एवं गुरुजनों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव नहीं रखता वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। आज आनलाइन शिक्षा का चलन बढ़ रहा है परंतु प्राथमिक और प्रारंभिक शिक्षा हमेशा विद्यालय के प्रांगण में ही संभव है, जहां हम समाजिक तालमेल के साथ मानवीय मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करते हैं,केवल अंकों का ज्ञान नहीं। अभिलाष ठाकुर ने कहा कि अ से अनार, क से कबूतर एवं ज से जहाज तो कोई भी पढ़ सकता है लेकिन एक शिक्षक ही है जो समझाता है कि अ से अधिकार के लिए आवाज उठानी है, क से कर्तव्यनिष्ठ बनना हैं और ज से जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की सेवा करनी है। कोई भी तकनीक शिक्षक की जगह नहीं ले सकती। तकनीक जल तो दे सकती है लेकिन प्यास बुझाने के लिए उस जल में मिठास शिक्षक ही घोलता है। शिवम मिश्रा ने कहा कि गुरु जीवन के आधार है, हमें कठिन से कठिन समय में जिन्होंने सही मार्ग पर चलना सिखाया उनके प्रति आभारी है। भारतीय संस्कृति में गुरुओं का स्थान सदैव ऊपर रहा है । वालेंटियर मधु प्रसाद ने कहा कि जीवन जीने की सच्ची कला हमें शिक्षक ही सिखातें है। एक अबोध बालक को सुबोध नागरिक बनाने का दायित्व सदैव शिक्षक ही निभाते हैं।
वालेंटियर आशुतोष मालवीय ने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान के शिल्प से सभ्य, सुसंस्कृत समाज की नींव रखते हैं और नि:स्वार्थ भाव से राष्ट्र के भविष्य निर्माण में सहयोग करते हैं। शिक्षक ही है जो न केवल सफ़ल होना सिखाता है बल्कि, असफ़लता से भी रास्ता निकाल लेना सिखाता है। आपदा को अवसर बना लेने की शिक्षा भी उन्ही से प्राप्त होती है।