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श्रीराम कथा के समापन अवसर पर दिया पत्रकारों को आशीर्वाद
March 8, 2020 • Admin
गंजबासौदा। वेदांत आश्रम में समायोजित श्री राम कथा एवं श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के नवम दिवस में श्रीमद जगद्गुरु अनंतानंद द्वाराचार्य काशी पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राम कमल दास वेदांती जी महाराज द्वारा नगर के पत्रकारों को माला पहनाकर एवं डायरी भेंट कर आशीर्वाद दिया, नो दिन से वेदांत आश्रम में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिवस प्रसादी वितरण एवं होली महोत्सव मनाकर श्रीराम कथा का समापन किया गया। समापन के अंतिम दिवस श्री वेदांती महाराज  ने श्री राम कथा का सार बताते हुए कहा कि श्री राम कथा इस लोक और परलोक दोनों को सुधारती है। श्री राम कथा एवं श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन दिवस पर अपने प्रवचनों में श्री हनुमत चरित्र एवं रावण वध की कथा को संगीतमय शैली के साथ सुनाते हुए स्वामी श्री वेदांती जी महाराज ने कहा कि विश्व में श्री हनुमान जी की पूजा भगवान राम से भी ज्यादा होती है भगवान राम को तो समुद्र पार करने के लिए पुल बनाना पड़ा लेकिन श्री हनुमान जी एक छलांग में ही समुद्र को पार कर गए श्री हनुमान जी के चरित्र से मानव समाज को निष्काम सेवा और सच्चे प्रेम की शिक्षा मिलती है। खुद भगवान राम ने भी भारत के समक्ष हनुमान की सेवा और निश्चल प्रेम की प्रशंसा की थी। श्री हनुमान जी ने अपनी सेवा और प्रेम से संपूर्ण संसार के मालिक भगवान श्रीराम को अपने वशीभूत कर लिया था कथा के क्रम में शबरी की नवधा भक्ति भी स्वामी जी ने गूढ़ व्याख्या करते हुए कहा कि भक्ति वह साधना है जो प्राणी मात्र में ईश्वर दर्शन की प्रेरणा देती है भगवान के भक्तों को सभी प्राणियों में राग द्वेष रहित प्रेम रखना चाहिए हमें कभी भी किसी भी प्राणी को ऊंच.नीच भाव के साथ अपमानित नहीं करना चाहिए पता नहीं वह परमात्मा किस रूप में हमारे सामने आ जाए भक्त नामदेव जी को कुत्ते में ही भगवान मिल गए थे। बाली बध की कथा सुनाते हुए स्वामी वेदांती जी महाराज ने बताया कि अपनी बेटी, भाई की पत्नी अपनी पुत्रवधू और कन्या को समान दृष्टि से देखना चाहिए यदि रामायण के संदेशों को मनुष्य अपने जीवन में उतार ले तो नारी जाति कहीं भी सुरक्षित नहीं रहेगी। रावण के प्रसंग में स्वामी वेदांती जी महाराज ने बताया कि अनाचारी कितना भी प्रगति कर लें और वह प्प्राणी कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो उसका एक दिन विनाश होता ही है। रावण ने भगवान शिव से अजय अमर वरदान मांगा था फिर भी संत को सताने वाले और माता सीता का हरण करने वाले अनाचारी रावण भगवान राम के हाथों मारा गया। मनुष्य को सुख और दुख की प्राप्ति उसके अच्छे और बुरे कर्मों का परिणाम होता है अच्छे काम करने वाला मनुष्य सुखी तथा बुरे कर्म करने वाला हमेशा दुखी रहता है कथा के समापन दिवस पर होली का भी आयोजन किया गया फूलों की होली खेल कर परम पूज्य जगद्गुरु स्वामी वेदांती जी महाराज ने सभी को होली की शुभकामनाएं दी और होली के भजनों पर सभी भक्तों थिरक रहे थे । कथा के अंतिम दिवस हजारों की संख्या में भक्ति वेदांत आश्रम में कथा सुनने के लिए उमड़ पड़े थे।