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स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा / कोरोना से लडऩे के लिए 50 हजार वेंटिलेटर, 2 लाख से ज्यादा बेड की जरूरत
March 27, 2020 • Admin • राष्ट्रीय
नई दिल्ली. भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम कोव-इंड-19 का दावा है कि यही रफ्तार रही तो मई के मध्य तक 1 लाख से 13 लाख तक संक्रमितों की संख्या पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने लिए भारत में मौजूदा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल उपकरण नाकाफी है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019  के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में करीब 32 हजार सरकारी, सेना और रेलवे के अस्पताल हैं। इनमें करीब 4 लाख बेड हैं। निजी अस्पतालों की संख्या 70 हजार के करीब हैं। इसके अलावा क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, कम्युनिटी सेंटर भी हैं। सब मिलाकर करीब 10 लाख बेड होते हैं। आबादी के लिहाज से देखा जाए तो भारत में करीब 1700 लोगों पर एक बेड है। अब आईसीयू और वेंटिलेटर की स्थिति देखें तो यह भी काफी कम है। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर के मुताबिक, देश भर में तकरीबन 70 हजार आईसीयू बेड हैं। जबकि 40 हजार वेंटिलेटर मौजूद है। इसमें भी महज 10 प्रतिशत ही खाली हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से निपटने के लिए भारत को अगले एक महीने के अंदर अतिरिक्त 50 हजार वेंटिलेटर और अस्पतालों में 2 लाख से ज्यादा बेड की जरूरत पड़ सकती है। जबकि आईसीयू बेड की करीब 70 हजार जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर देर से ही सही, लेकिन अलग-अलग स्तरों पर सरकारों ने कोशिशें शुरू कर दी हैं। एक तरफ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला अस्पतालों में एक-एक बिल्डिंग केवल कोरोना पीडि़तों के लिए तैयार करने का आदेश दिया है तो ओडिशा सरकार ने 15 दिनों में 1 हजार बेड का अस्पताल तैयार करने का फैसला लिया है। हालांकि, ये कोशिशें जरूरत के हिसाब से काफी कम हैं।  
दुनियाभर में वेंटिलेटर का संकट
कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज में वेंटिलेटर की सबसे अहम भूमिका होती है। सांस लेने में तकलीफ होने पर वेंटिलेटर का ही सहारा होता है। पूरी दुनिया इस वक्त वेंटिलेटर के इंतजाम में लगी है। यूरोप के कई देश वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनियों को आर्डर कर रहे हैं। ब्रिटेन सरकार ने वहां की कई इंजीनियरिंग कंपनियों से पूछा है कि क्या दो हफ्ते में 15 से 20 हजार वेंटिलेटर का इंतजाम हो सकता है? जर्मनी ने 10 हजार और इटली ने 5 हजार वेंटिलेटर का आर्डर किया है। दोनों देश आईसीयू की क्षमता भी दोगुना करने में जुटे हुए हैं। दुनियाभर में वेंटिलेटर बनाने वाली चार-पांच ही बड़ी कंपनियां हैं। इस वक्त इनके पास भी वेंटिलेटर बनाने की इतनी क्षमता नहीं रह गई है, क्योंकि दुनिया के कई बड़े देश बड़ी संख्या में आर्डर दे रहे हैं और सभी को जल्दी चाहिए। 
अन्य देशों के अस्पतालों में भी है बेड का संकट 
अस्पतालों में बेड का संकट केवल भारत में नहीं है। बल्कि कोरोना की शुरूआत करने वाले चीन में भी हैं। यहां प्रत्येक 1 हजार नागरिकों पर 4.2 बेड है। यही कारण है जब कोरोना का संकट यहां ज्यादा था तो बड़ी संख्या में होटल्स को अस्थाई हॉस्पिटल में बदल दिया गया था। इसी तरह फ्रांस में प्रत्येक 1 हजार नागरिक पर 6.5, दक्षिण कोरिया में 11.5, चीन में 4.2, इटली में 3.4 और अमेरिका में 2.8 बेड हैं। ये आंकड़े वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) से लिए गए हैं।