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विश्व निमोनिया दिवस मनाया गया
November 12, 2020 • Admin • मध्यप्रदेश

भोपाल । विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर गुरूवार को निमोनिया के प्रति जागरूकता के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। इस अवसर पर परिजनों को निमोनिया के लक्षणों की पहचान, कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में बताया गया। हेल्थ एण्ड वेलनेस केन्द्रों में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बताया गया कि निमोनिया एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों की मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण निमोनिया है। निमोनिया के लक्षणों की शीघ्र पहचान कर उपचार करवाना बेहद आवश्यक है। निमोनिया फेफड़ों के संक्रमण का एक रोग है जिसके कारण बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है। गंभीरता की स्थिति में उपचार ना होने के कारण बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। निमोनिया के अन्य लक्षण जैसे स्तनपान ना करना या आहार लेने में असमर्थ होना, नथुने फूलना, लगातार उल्टी होना, झटके आना या बेहोश होना है। निमोनिया से बचाव के लिए बच्चे को सभी टीके लगवाना 6 माह तक केवल स्तनपान, पर्याप्त पूरक आहार, सुरक्षित पेयजल, साबुन से हाथ धोना, स्वच्छता, घरेलू वायु प्रदूषण में कमी लाना आवश्यक है।

 निमोनिया के कारण बच्चे को सांस लेने में तकनीफ होती है और सांस फूलने लगती है। सर्दी, खांसी, बुखार की स्थिति में परिजन बच्चे की सांस की दर का परीक्षण कर निमोनिया के आरंभिक स्थिति का पता लगा सकते है। छोटे बच्चे का पेट सांस लेने के दौरान फूलता है। यदि 2 माह की उम्र तक का बच्चा एक मिनिट में 60 बार, 2 माह से एक साल का बच्चा एक मिनिट में 50 बार, 1 साल से 5 साल तक का बच्चा एक मिनिट में 40 बार से अधिक दर से सांस लेता है तो बिना विलंब किये चिकित्सकीय उपचार लें।

 निमोनिया का सही समय पर उपचार नहीं होने से ये जानलेवा हो सकता हैं। विशेष रूप से निमोनिया में स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया, हिमोफिलस इन्फ्लुएंजा बैक्टीरिया टाईप बी, खसरा, रूबेला, टीबी जैसे कारक शामिल हो जाने से जटिलाएं और अधिक बढ़ जाती है। शासन द्वारा नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत इन सभी बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाये जाते है।