मासूम बेटी की हत्या करने वाली मां को आजीवन कारावास, कोर्ट ने दिया सख्त संदेश

भोपाल की अदालत का बड़ा फैसला, 302 IPC के तहत दोषी करार

भोपाल ।  भोपाल की 23वीं अपर सत्र न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री अतुल सक्सेना ने एक माह की मासूम बच्ची की निर्मम हत्या करने वाली मां सरिता मेवाड़ा को आजन्म कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में बेटियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पुत्रियां सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की मजबूत कड़ी हैं।

यह मामला 16 सितंबर 2020 का है, जब सरिता मेवाड़ा ने अपनी एक माह की बेटी किंजल को पानी की टंकी में डुबोकर मार डाला। पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सरिता को दोषी करार दिया गया।

कैसे हुआ हत्या का खुलासा?

घटना का दिन: 16 सितंबर 2020, सुबह 11 बजे।
मां सरिता ने बताया कि उसने बच्ची को चारपाई पर सुलाया था, लेकिन वह गायब थी।
परिवार वालों ने खोजबीन की, शाम 4 बजे बच्ची का शव पानी की टंकी में मिला।
पति सचिन मेवाड़ा ने जब पूछताछ की, तो सरिता ने कबूल किया कि उसने बेटी को टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया था।
कारण: सरिता को लड़का चाहिए था, लेकिन बेटी पैदा होने से वह निराश थी।

अदालत ने क्या कहा?

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया ने पैरवी की।
पुलिस ने थाना खूजरी सड़क में धारा 302 IPC के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की।
  न्यायालय ने 104 पेज के विस्तृत फैसले में कहा कि बेटियां समाज का भविष्य हैं और उनका सम्मान अनिवार्य है।
न्यायालय ने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों को भी शामिल किया:
“जब एक पुत्री जन्म लेती है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर मानव जाति से अप्रसन्न नहीं है।”

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